नई दिल्ली, 29 अप्रैल: देशभर में मुस्लिम समुदाय के लोग साल के सबसे बड़े त्योहारों में से एक 'बकरीद' (Bakrid) (ईद-उल-अजहा) की तैयारियों में जुट गए हैं. इस्लामिक चंद्र कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व धू-अल-हिज्जाह (Dhu al-Hijjah) महीने की 10 तारीख को मनाया जाता है. वर्ष 2026 में भारत में बकरीद 27 मई (बुधवार) या 28 मई (गुरुवार) को मनाए जाने की प्रबल संभावना है. इस अवसर पर जहां कुर्बानी और इबादत का महत्व है, वहीं महिलाएं अपने सजने-संवरने और मेहंदी को लेकर काफी उत्साहित रहती हैं, इसलिए कई दिन पहले से महिलाएं त्योहार को लेकर खूबसूरत व आकर्षक मेहंदी डिजाइन्स की तलाश करने लगती हैं. यह भी पढ़ें: बकरीद 2026: इस ईद अपने हाथों पर सजाएं ये खूबसूरत मेहंदी डिजाइन्स, जानें लेटेस्ट ट्रेंड्स
बकरीद स्पेशल मेहंदी: ट्रेंड में हैं ये डिजाइन्स
बकरीद के मौके पर महिलाएं अक्सर ऐसे डिजाइन्स की तलाश में रहती हैं जो दिखने में सुंदर हों और लगाने में आसान. इस साल अरेबिक मेहंदी, मंडला आर्ट और फ्लोरल बेल काफी डिमांड में हैं. अगर आप वर्किंग हैं और कम समय में मेहंदी रचाना चाहती हैं, तो केवल हथेलियों के बीच में एक बड़ा 'चांद-तारा' या 'मस्जिद की मीनार' का मोटिफ बनवा सकती हैं, जो बकरीद के थीम के साथ पूरी तरह मेल खाता है.
बलिदान और निष्ठा का प्रतीक है यह पर्व
बकरीद का त्योहार पैगंबर इब्राहिम के अल्लाह के प्रति अटूट समर्पण और बलिदान की याद में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब अल्लाह ने उनकी परीक्षा लेने के लिए उनके बेटे इस्माइल की कुर्बानी मांगी, तो इब्राहिम ने बिना झिझक आदेश का पालन किया. उनकी निष्ठा देखकर अल्लाह ने इस्माइल की जगह वहां एक दुंबा (बकरा) रख दिया. यह घटना सिखाती है कि अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण ही सबसे बड़ी इबादत है. यह भी पढ़ें: Eid-ul-Fitr 2026: चांद रात की तैयारियों में छाए ये 40+ लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स, जानें इस साल के टॉप ट्रेंड्स और गहरा रंग पाने के टिप्स
बकरीद के लिए सिंपल अरेबिक मेहंदी डिजाइन
ईद-उल-अजहा के लिए खूबसूरत मेहंदी डिजाइन
पैरों के लिए खूबसूरत व मनमोहक डिजाइन
बकरीद के लिए सुंदर मेहंदी डिजाइन
ईद के लिए सिंपल और आकर्षक मेहंदी डिजाइन
कुर्बानी और सामाजिक समरसता
बकरीद के दिन नमाज के बाद सामर्थ्य अनुसार कुर्बानी दी जाती है. इस रस्म की सबसे खास बात गोश्त का वितरण है. इसे तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है:
- पहला हिस्सा: गरीबों और जरूरतमंदों के लिए.
- दूसरा हिस्सा: रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए.
- तीसरा हिस्सा: स्वयं के परिवार के लिए. यह व्यवस्था समाज में भाईचारे और परोपकार की भावना को मजबूत करती है.
तैयारियों का सिलसिला शुरू
त्योहार के करीब आते ही बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है. नए कपड़ों और जेवर के साथ-साथ मेहंदी आर्टिस्ट्स के पास भी बुकिंग शुरू हो गई है. कई महिलाएं घर पर ही कीप (Cone) लाकर पारंपरिक डिजाइन्स रचा रही हैं. ईद की नमाज के बाद गले मिलकर एक-दूसरे को मुबारकबाद देने और स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेने के साथ यह उत्सव संपन्न होता है.












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