Devshayani Ekadashi 2025 Messages: शुभ देवशयनी एकादशी! अपनों को भेजें ये हिंदी Quotes, WhatsApp Wishes, GIF Greetings और Photo SMS
देवशयनी एकादशी के दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से जातक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समद्धि व खुशहाली का आगमन होता है. ऐसे में इस अति पावन अवसर पर आप इन हिंदी मैसेजेस, कोट्स, वॉट्सऐप विशेज, जीआईएफ ग्रीटिंग्स और फोटो विशेज के जरिए अपनों को देवशयनी एकादशी की हार्दिक बधाई दे सकते हैं.
Devshayani Ekadashi 2025 Messages in Hindi: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया जाता है और इसे सभी व्रतों में उत्तम माना जाता है. वैसे तो हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादथी तिथि को एकादशी का व्रत किया जाता है, जो जगत के पालनहार भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) का व्रत किया जाता है, जिसे आषाढ़ी एकादशी (Ashadhi Ekadashi), हरिशयनी एकादशी (Harishayani Ekadashi) और पद्मनाभा एकादशी (Padmanabha Ekadashi) जैसे नामों से भी जाना जाता है. इस साल देवशयनी एकादशी का व्रत 6 जुलाई 2025 को किया जा रहा है. इस एकादशी को श्रीहरि के शयनकाल का प्रारंभ दिवस भी माना जाता है, क्योंकि इसी दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चतुर्मास की शुरुआत हो जाती है, इसी के साथ चार महीनों के लिए सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है.
देवशयनी एकादशी के दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से जातक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समद्धि व खुशहाली का आगमन होता है. ऐसे में इस अति पावन अवसर पर आप इन हिंदी मैसेजेस, कोट्स, वॉट्सऐप विशेज, जीआईएफ ग्रीटिंग्स और फोटो विशेज के जरिए अपनों को देवशयनी एकादशी की हार्दिक बधाई दे सकते हैं.
प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा के लिए चले जाते हैं और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को वे योगनिद्रा से बाहर आते हैं, तब देवउठनी एकादशी मनाई जाती है. भगवान विष्णु के शयनकाल यानी चतुर्मास के दौरान सृष्टि के संचालन का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं और जब श्रीहरि योगनिद्रा से बाहर आते हैं तो फिर से वो सृष्टि के संचालन का कार्यभार अपने हाथों में ले लेते हैं.