Chhatrapati Shivaji Jayanti 2023: कब है शिवाजी जयंती? जानें इसका इतिहास, सेलिब्रेशन और शिवाजी की शौर्य गाथाएं!
Chhatrapati Shivaji Maharaj Photo: Wikimedia Commons

भारतीय वीर सपूतों में से एक माने जाने वाले शौर्य एवं साहस के प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Jayanti) भारतीय गणराज्य के महानायक माने जाते हैं. मराठा इतिहास में शिवाजी महाराज पहले छत्रपति एवं मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे. उन्होंने साल 1674 में मराठा साम्राज्य की नींव रखी थी. वह एक धर्मनिरपेक्ष राजा थे. इस वर्ष देश भर में 19 फरवरी, 2023 को शिवाजी महाराज की 393 वीं जयंती मनाई जाएगी. महाराष्ट्र में इस दिन को एक पर्व के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है, लोग शिवाजी महाराज के शौर्य एवं देश के प्रति योगदान को याद करते हैं. आइये जानते हैं इस वीर सपूत की जयंती का महत्व, इतिहास एवं उनकी शौर्य गाथाएं इत्यादि.

शिवाजी महाराज का निजी जीवन

शिवाजी का जन्म 19 फरवरी, 1630 को, शिवनेरी किले (पुणे) में शाहजी राजे और जीजाबाई के घर हुआ था. शाहजी के ज्यादातर युद्ध-क्षेत्र में होने से शिवाजी ने माँ जीजाबाई के कुशल नेतृत्व में राजनीति एवं कूटनीति के साथ-साथ घुड़सवारी और तलवारबाजी सीखा था. वह बचपन से बहादुर और साहसी थे. उन्होंने सईबाई, सोयराबाई, काशीबाई, पुतलाबाई, सकवरबाई और सुगना बाई से विवाह किया था. साईबाई से पुत्र संभाजी, सोयराबाई से पुत्र राजाराम, और पुत्री दीपाबाई, सगुनाबाई से राज कुंवर बाई और सकवरबाई से पुत्री कमलाबाई हुए थे. 3 अप्रैल 1680 में रायगढ़ में तेज बुखार और पेचिश के कारण शिवाजी का निधन हुआ था, उस समय उनकी आयु 52 वर्ष की थी. उनकी मृत्यु का वास्तविक कारण आज भी रहस्यमय है. यह भी पढ़ें : Perfume Day 2023 Wishes: परफ्यूम डे की इन फनी हिंदी WhatsApp Messages, Quotes, Facebook Greetings, SMS के जरिए दें शुभकामनाएं

शिवाजी महाराज जयंती का इतिहास

शिवाजी जयंती मनाने की शुरुआत साल 1870 में पुणे में महात्मा ज्योतिराव फुले ने की थी. ज्योतिराव ने ही रायगढ़ में शिवाजी की समाधि की खोज की थी. इस परंपरा को बाल गंगाधर तिलक ने जोर-शोर से मनाने के सिलसिले को आगे बढ़ाया था. यहां तक कि ब्रिटिश हुकूमत से आजादी पाने के लिए बाल गंगाधर तिलक ने शिवाजी की शौर्यगाथा का सार्वजनिक गुणगान करते हुए आम जनता को अंग्रेजों के खिलाफ एक जुट करने की कोशिश की थी. कहा जाता है कि उनकी यह युक्ति काफी कारगर साबित हुई थी.

शिवाजी जयंती सेलिब्रेशन

19 फरवरी को पूरे महाराष्ट्र में शिवाजी जयंती मराठा रीति-रिवाज और बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. एक भव्य जुलूस निकाला जाता है, जिसमें स्थानीय कलाकार पारंपरिक एवं सांस्कृतिक गीत-संगीत पर नृत्य करते हैं. कुछ स्थानों पर छत्रपति शिवाजी के शौर्य एवं साहस को दर्शाने वाले नाटकों का मंचन भी होता है. मंच पर शिवाजी की वीर गाथाओं को याद किया जाता है. जुलूस छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं. मुंबई में इस दिन महिलाएं शाही वेश में मोटरसाइकिल पर शहर के मुख्य हिस्सों पर जुलूस निकालती है.

शिवाजी की शौर्य गाथाएं

शिवाजी को अद्भुत रणनीति, उत्कृष्ट नेतृत्व, साहस और शौर्य की दीक्षा माँ जीजाबाई एवं दादाजी कोणदेव से मिली थी. शिवाजी माउंटेन रैट (पहाड़ी चूहा) के नाम से भी मशहूर थे. वह अपने क्षेत्र के चप्पे-चप्पे से वाकिफ थे. कहीं भी अचानक प्रकट होकर हमला कर गायब हो जाते थे. वे गुरिल्ला युद्ध नीति के जरिये सेना की छोटी टुकड़ी के साथ छिपकर अचानक दुश्मनों पर आक्रमण करते और उसी तेजी से जंगलों और पहाड़ों में छिप जाते थे. उन्हें गुरिल्ला युद्ध का जनक कहा जाता है. ऐसा ही एक उदाहरण है,

शिवाजी ने जब पूरे दक्षिण पर कब्जा कर लिया, और यह जानकारी जब औरंगजेब को मिली, तो उसने अपने सुबेदार मामा शाइस्ता खां को डेढ़ लाख सेना के साथ शिवाजी को खत्म करने भेजा. शाइस्ता खां फौज के साथ सूपन और चाकन दुर्ग पर पहुंचकर खूब लूटपाट की. शिवाजी को यह बात पता चली. उन्होंने 350 सैनिकों के साथ शाइस्ता खान पर गुरिल्ला हमला कर दिया. शाइस्ता खां ने शिवाजी की इस रणनीति की कल्पना भी नहीं की थी, शाइस्ता खां बचकर भाग तो निकला, लेकिन शिवाजी के तलवार के वार से उसकी चार उंगलियां कटकर गिर पड़ी. औरंगजेब समझ गया कि शिवाजी सामान्य योद्धा नहीं हैं, उसने धोखे से शिवाजी को आगरा के किले में कैद कर लिया. लेकिन शिवाजी मुगल सैनिकों को चकमा देकर वहां से भाग निकलने में सफल रहे.

साल 1659 में आदिलशाह ने अपने अनुभवी सेनापति अफजल खान को शिवाजी की हत्या के लिए भेजा. उन्हें प्रतापगढ़ किले के नीचे एक झोपड़ी में मिलना था. दोनों के बीच पहले ही समझौता हो गया था कि दोनों एक तलवार लेकर आएंगे. शिवाजी अफजल खान के षड्यंत्र से वाकिफ थे. वह अफजल से मिले, अफजल ने गले मिलने के बहाने जैसे ही शिवाजी पर कटार से हमला करना चाहा, शिवाजी ने फुर्ती से अपने बघनख से अफजल का सीना फाड़ के मार दिया.

शिवाजी को फादर ऑफ इंडियन नेवी भी कहा जाता है, क्योंकि भारत की नौसेना यानी मॉर्डन नेवी को शिवाजी की नेवी का हिस्सा माना जाता है. मराठा शासक छत्रपति शिवाजी को भारतीय नौसेना की नींव रखने का क्रेडिट दिया जाता है. मॉर्डन महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों के आसपास शिवाजी के नेवल अड्डों को हिंदू और मुस्लिम दोनों एडमिरलों द्वारा नियंत्रित किया जाता था जो कई मौकों पर पुर्तगालियों और अंग्रेजी आक्रमणकारियों को हराने के लिए जाने जाते हैं.