Chanakya Niti 2025: काम-पिपाशा में पुरुषों से 8 गुना ज्यादा होकर भी महिलाएं स्वयं पर कैसे नियंत्रण करती हैं? जानें चाणक्य नीति में क्या कहना चाहा है आचार्य ने!
चाणक्य का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था, उनकी शिक्षा तक्षशिला में हुई थी. चाणक्य ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें राजनीति, अर्थशास्त्र, चिकित्सा, युद्ध की रणनीति और ज्योतिष जैसे विभिन्न विषयों का गहन ज्ञान था. वह अत्यधिक विद्वान थे.
चाणक्य का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था, उनकी शिक्षा तक्षशिला में हुई थी. चाणक्य ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें राजनीति, अर्थशास्त्र, चिकित्सा, युद्ध की रणनीति और ज्योतिष जैसे विभिन्न विषयों का गहन ज्ञान था. वह अत्यधिक विद्वान थे. अपने इस विद्वता का उजागर उन्होंने अपने संस्कृत में लिखित चाणक्य नीति में किया. आचार्य चाणक्य नीति वस्तुतः जीवन का अमूल्य मार्गदर्शक है. यह आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने में सार्थकता और सफलता चाहते हैं. यहां चाणक्य नीति के ऐसे ही एक श्लोक के बारे में बताया गया है, जो स्त्रियों के मूलभूत गुणों को चरितार्थ करता है.
स्त्रीणां द्विगुण आहारो लज्जा चापि चतुर्गुणा।
साहसं षड्गुणं चैव कामश्चाष्टगुणः स्मृतः
चाणक्य नीति के खंड 17 में प्रकाशित इस श्लोक के अनुसार पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों का आहार यानी भोजन दुगुना होता है, लज्जा चार गुना और साहस छह गुना ज्यादा होता है, इसी वजह से उन्हें शक्ति स्वरूपा माना जाता है. इसके अलावा महिलाओं में एक विशेष गुण यह भी है कि वह काम भावना में भी पुरुषों से आठ गुना ज्यादा होती है, लेकिन संयम में भी पुरुषों से आगे होने के कारण अधिकांश महिलाएं अपनी कामपिपाशा पर नियंत्रण पा लेती हैं. यह भी पढ़ें : Odisha Foundation Day 2025: ओडिशा को ‘उत्कल’ क्यों कहते हैं? ओड़िशा दिवस पर जानें इसका प्राचीन इतिहास एवं कुछ रोचक फैक्ट!
विस्तार से समझें इसका अर्थ-
आचार्य चाणक्य ने इस श्लोक द्वारा स्त्री की कई विशेषताओं को उजागर किया है. स्त्री के कुछ ऐसे पक्ष हैं, जिन पर लोगों की नजर कम पड़ती है. चाणक्य कहते हैं कि भोजन की आवश्यकता पुरुष की अपेक्षा स्त्री को इसलिए ज्यादा है, क्योंकि उसे पुरुष की तुलना में ज्यादा शारीरिक कार्य करने पड़ते हैं.
चाणक्य आगे कहते हैं कि स्त्रियों में शर्म यानी लज्जा पुरुषों से चार गुना ज्यादा होती है, वहीं स्त्रियों में साहस छह गुना होता है, इसलिए स्त्रियों को शक्ति का स्वरूप माना गया है. चाणक्य के अनुसार स्त्रियों में काम इच्छा भी पुरुषों से आठ गुना अधिक होता है, लेकिन उनमें लज्जा एवं सहनशक्ति ज्यादा होने से वह इसे उजागर नहीं होने देतीं. वह धर्म एवं संस्कार का पालन करते हुए अपने परिवार का ध्यान रखती हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 01, 2025 11:29 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

