Balaji Jayanti 2024: कब है बालाजी जयंती? जाने क्या है इस दिन का महात्म्य, मुहूर्त एवं पूजा विधान!
Balaji Jayanti 2024

हिंदू धर्म शास्त्रों में बालाजी का विशेष महात्म्य बताया जाता है, यूं तो संपूर्ण भारत में बालाजी के प्रति विशेष आस्था एवं भक्ति है, लेकिन दक्षिण भारत स्थित लगभग छः सौ साल प्राचीन तिरुपति बालाजी मंदिर में देश-विदेश से आये दर्शनार्थियों की संख्या को देखते हुए इनके प्रति आस्था एवं विश्वास को आसानी से देखा और समझा जा सकता है. हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन बालाजी जयंती मनाई जाती है. बालाजी मंदिर में बालाजी जयंती के अवसर पर विशेष पूजा-अनुष्ठान एवं प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाता है, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होते हैं. हिंदू मान्यताओं के अनुसार बालाजी का दर्शन करने मात्र से जातक की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. नये साल में 4 जनवरी 2024, गुरुवार को बालाजी जयंती मनाई जाएगी. आइये जानते हैं कौन हैं बालाजी और क्या है इनका महात्म्य, मुहूर्त एवं पूजा विधि इत्यादि

कौन हैं तिरुपति बालाजी

तिरुपति बालाजी का वास्तविक नाम श्री वेंकटेश्वर स्वामी है. हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार ये विष्णु जी का स्वरूप हैं. मान्यता है कि भगवान श्री वेंकटेश्वर अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में निवास करते हैं. बालाजी उर्फ वेंकटेश्वर स्वामी जी की सच्चे मन और विधान के साथ पूजा-अनुष्ठान करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. बहुत सारे भक्त मनौतियों के अनुसार यहां आकर अपने बाल दान करते हैं. इस मंदिर के साथ बहुत सारी चमत्कारिक कहानियां जुड़ी हुई हैं. यह भी पढ़ें : Happy New Year 2024: पहली जनवरी को ही क्यों मनाते हैं नया साल? साथ ही जानें लीप ईयर की जरूरत क्यों पड़ी?

बालाजी जयंती का महत्व:

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने मानवता के उत्थान एवं पृथ्वी को सभी बुराइयों से मुक्त करने के लिए बालाजी के रूप में अवतार लिया था. इस दिन उनकी पूजा भगवान वेंकटेश स्वरूप में की जाती है. तिरुपति मंदिर को कलयुग का 'वैकुण्ठ' भी माना जाता है. मान्यता है कि भगवान बालाजी की विधिवत पूजा-अनुष्ठान से सभी प्रकार के भय एवं बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है, जीवन में अपार खुशियां आती हैं. भगवान बालाजी अपने भक्तों को शांति प्राप्त करने में मदद करते हैं और दूसरों के कल्याण के लिए भी काम करते हैं. जो व्यक्ति समर्पण भाव से भगवान बालाजी की पूजा करता है उसे जीवन के अंत में 'मोक्ष' प्राप्त होता है.

बालाजी जयंती (2024) मूल तिथि एवं मुहूर्त

मार्गशीर्ष अष्टमी प्रारंभः 10.05 PM (03 जनवरी 2023, बुधवार)

मार्गशीर्ष अष्टमी समाप्तः 07.48 PM (04 जनवरी 2023, गुरुवार)

उदया तिथि के अनुसार 4 जनवरी 2024 को बालाजी जयंती मनाई जाएगी.

बालाजी पूजा अनुष्ठान

बालाजी जयंती के दिन मंदिर की साफ-सफाई की जाती है. उन्हें फूलों पीतांबरों एवं स्वर्णाभूषणों से सजाया जाता है. मार्गशीर्ष अष्टमी कृष्ण पक्ष को प्रातःकाल श्रद्धालु स्नान-ध्यान करते हैं. पूजा के दरम्यान ‘ओम नमो नारायण’ मंत्र का जाप करते हैं इसके पश्चात वे मंदिर के गर्भगृह स्थित अंग प्रदक्षिणा करते हैं और बालाजी की पूजा-अनुष्ठान करते हैं. संध्याकाल के समय तिरुपति बालाजी महाआरती उतारी जाती है. बहुत सारे लोग इस दिन अपने घरों में भी बालाजी की पूजा करते हैं, उन्हें कुमकुम, सिंदूर, माला, पुष्प, रोली एवं तुलसी दल एवं प्रसाद में दूध से बनी मिठाई और फल चढ़ाया जाता है. मान्यता है कि बालाजी जयंती के दिन बहुत सारे श्रद्धालु अपने बाल का दान करते हैं, मान्यता है कि ऐसा करने से मन में व्याप्त सभी अहंकार एवं मोह-माया और नकारात्मक भावनाओं से मुक्ति मिलती है.