World Malaria Day 2021: आज है विश्व मलेरिया दिवस! मलेरिया उन्मूलन मामलों में भारत नंबर वन! जानें WHO की रिपोर्ट! मलेरिया होने पर क्या करें?
मच्छर (Photo Credits: Pixabay)

विश्व मलेरिया दिवस: 'मलेरिया' (Malaria) दुनिया की सबसे प्राचीनतम बीमारियों में एक है, जो मच्छरों के काटने से फैलता है. अगर मलेरिया के मरीज का समय रहते उचित इलाज नहीं करवाया जाये तो यह घातक साबित हो सकता है. भारत के लिए यह शुभ संकेत है कि यहां काफी हद तक मलेरिया पर नियंत्रण पाया जा चुका है, जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों अमेरिका, एशिया और अफ्रीका उप महाद्वीपों में मलेरिया आज भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है.

कब हुई विश्व मलेरिया दिवस की शुरुआत

मच्छरों के काटने से फैलने वाली इस बीमारी के स्वरूप और संक्रामकता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पाया कि इस बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए सरकारी उपायों के साथ-साथ लोगों में मलेरिया के प्रति जागरूकता अभियान की आवश्यकता है. इसे ध्यान में रखते हुए डबल्यूएचओ की संस्था वर्ल्ड हेल्थ एसेम्बली की मई 2007 की 60वें सत्र की बैठक में 25 मई को 'विश्व मलेरिया दिवस' मनाने का निर्णय लिया गया. (WHO) का कहना है कि मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रमों से बहुत सी जानें बचाई जा सकती हैं. हांलाकि इस अभियान में हमें काफी सफलता मिली है, लेकिन आज भी इस बीमारी के कारण होनेवाली मृत्यु दर को कम करने के लिए हमें काफी कुछ करना है. यह भी पढ़ें : क्या पीरियड्स के आसपास COVID-19 Vaccine ली जा सकती है? जानें मासिक धर्म और कोरोना टीकाकरण को लेकर डॉक्टरों की सलाह

कैसे फैलता है मलेरिया

'मलेरिया' का मुख्य लक्षण होता है ठंड और कंपकंपी के साथ तीव्र बुखार का आना. इसके साथ-साथ सिरदर्द और उलटी भी महसूस होती है. चिकित्सकों के अनुसार संक्रमित मादा एनाफ़िलीज मच्‍छर जब किसी स्वस्थ व्‍यक्ति को काटता है तो अपने लार के साथ मलेरिया परजीवियों को रक्‍त में पहुंचा देता है. संक्रमित मच्‍छर के काटने के 10 से 12 दिनों के बाद व्‍यक्ति में मलेरिया के लक्षण दिखने लगते हैं. मलेरिया के रोगी को काटने पर असंक्रमित मादा एनाफ़िलीज मच्‍छर रोगी के रक्त के साथ मलेरिया परजीवी को भी चूस लेते हैं. इसके बाद 12 से 14 दिनों में ये मादा एनाफ़िलीज मच्‍छर संक्रमित होकर जिस किसी को भी काटते हैं, उनमें मलेरिया होने की संभावनाएं रहती हैं. इस तरह एक मादा मच्छर कई स्वस्थ लोगों को भी मलेरिया से ग्रस्त कर देता है.

भारत में मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम

भारत में इस बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए काफी पहले से उपाय करना शुरु कर दिया था. स्वतंत्रता के बाद 'भारत सरकार' ने मलेरिया उन्मूलन के लिए वर्ष 1953 में 'राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम' (एनएमसीपी) चलाने के साथ ही डीडीटी का छिड़काव कार्य शुरू कर दिया था. इसके पश्चात 'WHO' के अनुरोध पर वर्ष 1958 में 'राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम' (एनएमईपी) शुरु किया गया आगे चलकर इसे 'मोडिफ़ाइड प्लान ऑफ़ ऑपरेशन' (एमपीओ) के नाम से नई योजना शुरू की गई. आज विश्व मलेरिया दिवस के मौके पर हमें उन छोटी-छोटी बातों का खास ख्याल रखना चाहिए, जिससे मलेरिया के फैलने की संभावनाएं होती हैं. हमें चाहिए कि अपने आसपास गंदा पानी जमा ना होने दें. पानी की टंकी, कूलर, एवं जल जमाव वाले स्थान की नियमित सफाई करते रहना चाहिए. कभी किसी में मलेरिया के लक्षण दिखें तो तत्काल चिकित्सक से मिलकर रक्त की जांच करवाकर इलाज शुरु करवानी चाहिए.

भारत में मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रमों पर WHO की प्रशंसात्मक रिपोर्ट!

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गत वर्ष माना कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में मलेरिया के न्यूनतम मामले दर्ज होने वालों में भारत नंबर वन पर है. विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2020 के अनुसार भारत ने 2000 मलेरिया मामलों की संख्या दो करोड़ से घटाकर 2019 में करीब साढ़े पांच लाख करने में कामयाबी हासिल कर ली थी. भारत ने मलेरिया से हुई मौतों की संख्या में भी कमी दर्ज की है. विश्व स्तर पर 2019 में 229 मीलियन मलेरिया के मामले दर्ज किये गये थे. जहां तक पूरी दुनिया में मलेरिया की घातकता की बात है तो आज भी मलेरिया से हर साल क़रीब 6 लाख 60 हज़ार लोगों की मृत्यु हो जाती है. इनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है. अफ़्रीका के उप सहारा क्षेत्र में आज भी मलेरिया की वजह से सबसे ज्यादा बच्चों की मृत्यु हो रही है.