भारत सरकार द्वारा जारी किए गए दो प्रकार के बॉन्ड टैक्स-फ्री बॉन्ड (Tax-Free Bonds) और सेक्शन 54EC (Section 54EC) के तहत आने वाले कैपिटल गेन बॉन्ड (Capital Gain Bonds) निवेशकों को टैक्स बचाने की सुविधा देते हैं. टैक्स-फ्री बॉन्ड से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री होता है, जबकि सेक्शन 54EC बॉन्ड में निवेश करने से प्रॉपर्टी बेचने पर होने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (Long Term Capital Gain) पर टैक्स से छूट मिलती है. हालांकि, यदि कोई निवेशक इन बॉन्ड्स को मैच्योरिटी (Maturity) से पहले बेचता है, तो उस पर टैक्स कैसे लगेगा यह एक अहम सवाल है, जिसे समझना जरूरी है.
उदाहरण के लिए, यही किसी निवेशक ने 2018 से 2020 के बीच छह टैक्स-फ्री बॉन्ड खरीदे है, जो 2028 के बाद मैच्योर होने वाले है, और उस निवेशक को इन बॉन्ड्स से हर साल टैक्स-फ्री ब्याज मिल रहा है. अब वह जानना चाहते हैं, कि अगर वह इन बॉन्ड्स को मैच्योरिटी से पहले बेचते हैं, तो क्या उन्हें टैक्स देना होगा? तो इसका जवाब है, हाँ भले ही इन बॉन्ड्स का ब्याज टैक्स फ्री होता है, लेकिन यदि इन्हें स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) या अन्य माध्यम से बेचा जाता है, और बिक्री मूल्य, खरीद मूल्य से अधिक है, तो उस अंतर को कैपिटल गेन (Capital Gain) माना जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा.
यदि इन बॉन्ड्स को खरीदने के 12 महीने के अंदर बेचा जाता है, तो उस पर 20% की दर से शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (Short Term Capital Gains) टैक्स लगेगा. वहीं, यदि इन्हें 12 महीने से अधिक समय के बाद बेचा जाता है, तो उस पर 12.5% की दर से लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा. चूंकि सरकार ने नए टैक्स-फ्री बॉन्ड कई वर्षों से जारी नहीं किए हैं, इसलिए अधिकांश पुराने बॉन्ड्स पर अब लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन की दर ही लागू होती है.
वहीं दूसरी ओर, जिन निवेशकों ने अपनी प्रॉपर्टी बेचने पर हुए लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन को बचाने के लिए सेक्शन 54EC के तहत आने वाले कैपिटल गेन बॉन्ड्स में निवेश किया है, जैसे कि पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC), हुडको (HUDCO), एनएचएआई (NHAI), आरईसी (REC) या इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (Indian Railway Finance Corporation), उन्हें इन बॉन्ड्स में कम से कम 5 साल तक निवेश बनाए रखना जरूरी होता है. अगर इन बॉन्ड्स को 5 साल की लॉक-इन अवधि (Lock-In Period) पूरी होने से पहले बेच दिया जाता है, तो निवेशक को उस पर कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ सकता है.
इसलिए, अगर आपने टैक्स-फ्री या सेक्शन 54EC कैपिटल गेन बॉन्ड्स में निवेश किया है, और अब उन्हें बेचने का विचार कर रहे हैं, तो पहले टैक्स नियमों को अच्छी तरह समझ ले. जल्दबाजी में निर्णय लेने से आपकी टैक्स छूट पर असर पड़ सकता है, और आपको अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है.













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