Online Gaming Bill 2025 क्या है? जिसे मोदी कैबिनेट ने दे दी मंजूरी, अब Betting यानी Satta लगाना माना जाएगा अपराध
Satta Matka | X

Online Gaming Bill 2025: देश में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को लेकर केंद्र सरकार (Modi Government ने एक बड़ा फैसला लिया है. मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट ने एक अहम विधेयक को हरी झंडी दे दी है. इस विधेयक के तहत अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सट्टेबाजी (Satta Matka) की गतिविधियों को अपराध माना जाएगा और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इतना ही नहीं, ऐसे प्लेटफॉर्म का प्रचार करने वाले मशहूर हस्तियों और प्रभावशाली लोगों पर जुर्माना या सजा भी हो सकती है. सूत्रों की मानें तो सरकार बुधवार को लोकसभा (Lok Sabha) में यह विधेयक पेश करने वाली है.

इस कानून के लागू होने के बाद ऑनलाइन गेमिंग उद्योग (Online Gaming Industry) को एक केंद्रीकृत ढांचे के तहत लाया जाएगा, ताकि राज्यों के अलग-अलग कानूनों से पैदा होने वाली समस्याओं को दूर किया जा सके.

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नियामक कौन होगा?

जानकारी के अनुसार, इस पूरी व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को दी जा सकती है. मंत्रालय का कहना है कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य गेमिंग के नाम पर फैल रहे जुए और धोखाधड़ी को रोकना (Preventing Fraud) और बच्चों व युवाओं को इसकी लत से बचाना (Prevention of Addiction) है.

पिछले कुछ वर्षों से बढ़ता दबाव

दरअसल, पिछले कुछ समय से ऑनलाइन गेमिंग (Online Gaming) और सट्टेबाजी (Betting) को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. अक्टूबर 2023 से सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग पर 28 प्रतिशत जीएसटी (GST) लगा दिया था. इसके अलावा, इन प्लेटफॉर्म्स से जीती गई राशि पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जा रहा है, जो 2025 से लागू हो गया है. इतना ही नहीं, विदेशों में चल रहे गेमिंग पोर्टल्स (Gaming Portals) को भी भारतीय कर के दायरे में लाया गया है.

अवैध साइट्स पर कार्रवाई

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी साइट्स पंजीकृत नहीं हैं या नियमों का उल्लंघन करती हैं, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी. 2022 से अब तक 1500 से ज़्यादा अवैध वेबसाइटों (Gaming Websites) को ब्लॉक करने के आदेश दिए जा चुके हैं.

क्यों जरूरी है यह विधेयक?

विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग अक्सर शौक से ज्यादा एक लत बन गई है. खासकर बच्चे और युवा घंटों इसमें फंसे रहते हैं. इसके अलावा, धोखाधड़ी, अचानक पैसों का नुकसान और राज्यों के बीच अलग-अलग क़ानूनों के कारण स्थिति और भी जटिल हो गई थी. यही वजह है कि अब केंद्र सरकार ने इसे सख्ती से नियंत्रित करने का फ़ैसला किया है.

क्या होगी आगे की राह?

विधेयक पेश होने के बाद, संसद में इस पर बहस होगी और दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा. अगर यह लागू हो जाता है, तो आने वाले दिनों में भारत में ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया पूरी तरह बदल सकती है.