MY Hospital News: मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित महाराजा यशवंतराव ( Maharaja Yeshwantrao Hospital) अस्पताल में लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया हैं. जहां नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती दो नवजात बच्चों को चूहों (Rates) ने कुतर दिया. इस लापरवाही के चलते दोनों बच्चों की मौत हो गई. पहली घटना रविवार को हुई, जिसमें एक नवजात की उंगलियों को चूहों ने काटा, और मंगलवार को उसकी मौत हो गई. इसके बाद सोमवार को दूसरी नवजात बच्ची के सिर और कंधे पर चूहों ने हमला किया, और बुधवार को उसने भी दम तोड़ दिया. इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की लचर व्यवस्था और गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है.
अस्पताल की सफाई
अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने मामले में सफाई देते हुए दावा किया कि दोनों नवजात जन्मजात बीमारियों से पीड़ित थे. मंगलवार को मृत बच्ची का वजन काफी कम था, और उसे हृदय संबंधी समस्याएं, कम हीमोग्लोबिन और सेप्टीसीमिया (रक्त संक्रमण) था. दूसरी बच्ची, जो देवास से रेफर होकर आई थी, उसका वजन भी कम था और उसे आंतों की जटिलताओं के कारण सर्जरी की गई थी. डॉ. यादव ने कहा कि चूहों के काटने से मौत नहीं हुई, बल्कि ये बीमारियां मौत का कारण थीं. उप अधीक्षक डॉ. जितेंद्र वर्मा ने भी यही तर्क दोहराया. यह भी पढ़े: Rats at Cooper Hospital: मुंबई के कूपर अस्पताल में चूहों का आतंक, महिला वार्ड में घूमते आए नजर; मरीजों के परिजनों ने सुरक्षा को लेकर जताई चिंता; VIDEO
महाराजा यशवंतराव अस्पताल में लापरवाही
स्टाफ ने स्वीकार किया NICU चूहे हैं
हालांकि, अस्पताल स्टाफ ने स्वीकार किया कि NICU में लंबे समय से एक बड़ा चूहा घूम रहा था, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. अस्पताल और आसपास का मेडिकल कैंपस, जिसमें चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, कैंसर अस्पताल, और टीबी व चेस्ट सेंटर शामिल हैं, चूहों का गढ़ बन चुका है.
बारिश और पेस्ट कंट्रोल की नाकामी
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि हाल की भारी बारिश के कारण झाड़ियां उग आईं और चूहों के बिलों में पानी भर गया, जिससे चूहे अस्पताल परिसर में घुस आए. प्रबंधन ने यह भी दावा किया कि अब तक 12,000 से अधिक चूहों को मारने के लिए अभियान चलाए गए, लेकिन ये प्रयास नाकाम रहे. पेस्ट कंट्रोल कंपनी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, और अब हर सात दिन में कीट नियंत्रण कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं.
मामले में कार्रवाई
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने दो नर्सिंग कर्मचारियों को निलंबित कर दिया, नर्सिंग अधीक्षक को हटा दिया गया, और विभागाध्यक्ष (HOD) व अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. पांच डॉक्टरों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो एक सप्ताह में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी. मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने भी अस्पताल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले
यह कोई नई घटना नहीं है. 2023 में भोपाल के हमीदिया अस्पताल में एक शव का कान, विदिशा जिला अस्पताल में शव का नाक और हाथ, और सागर जिला अस्पताल में शव की आंखें चूहों ने कुतर दी थीं. इन घटनाओं ने भी सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति को उजागर किया था.












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