AI Girlfriend Scam: बेंगलुरु के टेक इंजीनियर से 1.5 लाख की ठगी; 'डीपफेक' वीडियो कॉल के जरिए जालसाजों ने बनाया सेक्सटॉर्शन का शिकार
स्कैम अलर्ट (Photo Credits: Pexels)

बेंगलुरु: भारत की आईटी राजधानी बेंगलुरु में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) यानी  एआई (AI) के दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. एजीपुरा (Ejipura) के रहने वाले एक 28 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर (Software Engineer) को एक 'AI गर्लफ्रेंड' और डीपफेक (Deepfake) तकनीक के जरिए 'सेक्सटॉर्शन' (Sextortion) का शिकार बनाया गया है. पीड़ित इंजीनियर ने बदनामी के डर से जालसाजों को करीब 1.5 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए. साइबर क्राइम पुलिस (Cybercrime Police) ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.  यह भी पढ़ें: AI के बढ़ते दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर, राष्ट्रीय रेगुलेटरी बॉडी बनाने की मांग

कैसे बुना गया 'AI गर्लफ्रेंड' का जाल?

पुलिस के अनुसार, पीड़ित की मुलाकात एक लोकप्रिय डेटिंग ऐप पर एक युवती की प्रोफाइल से हुई थी. कुछ दिनों की सामान्य बातचीत के बाद, आरोपियों ने उसे व्हाट्सएप (WhatsApp) पर चैट करने के लिए राजी कर लिया. विश्वास जीतने के लिए जालसाज नियमित रूप से फोटो और मैसेज भेजते रहे, जिससे प्रोफाइल पूरी तरह असली लगी.

जल्द ही बातचीत निजी वीडियो कॉल तक पहुंच गई। कॉल के दौरान स्क्रीन पर दिख रही महिला ने कपड़े उतारना शुरू कर दिया और पीड़ित को भी ऐसा ही करने के लिए उकसाया. पीड़ित को इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह जिससे बात कर रहा है, वह कोई वास्तविक महिला नहीं बल्कि डीपफेक तकनीक से तैयार एक AI अवतार था, जो वास्तविक समय में प्रतिक्रिया दे रहा था.

वीडियो कॉल से 'ब्लैकमेलिंग' तक का सफर

वीडियो कॉल खत्म होने के तुरंत बाद, इंजीनियर को उसके निजी पलों की एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग भेजी गई. जालसाजों ने धमकी दी कि यदि उसने पैसे नहीं दिए, तो यह वीडियो उसके परिवार और सहकर्मियों को भेज दिया जाएगा.। घबराहट में पीड़ित ने कई किस्तों में कुल 1.5 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए. जब पैसों की मांग बंद नहीं हुई, तब उसे अहसास हुआ कि वह एक बड़े रैकेट का शिकार हो चुका है.

कानूनी कार्रवाई और पुलिस की चेतावनी

बेंगलुरु नॉर्थ डिवीजन की साइबर क्राइम पुलिस ने आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. जांचकर्ताओं का मानना है कि यह एक संगठित नेटवर्क है जो बिना किसी वास्तविक व्यक्ति को कैमरे के सामने लाए, AI टूल्स को 'डिजिटल चारे' के रूप में इस्तेमाल कर रहा है. यह भी पढ़ें: सद्गुरु का नकली का AI वीडियो दिखाकर महिला से 3.75 करोड़ रुपये की ठगी, बेंगलुरु में ऐसे हुआ बड़ा फ्रॉड

साइबर विशेषज्ञों ने डीपफेक कॉल को पहचानने के कुछ तरीके बताए हैं:

  • वीडियो कॉल के दौरान व्यक्ति की आंखों का अप्राकृतिक तरीके से झपकना.
  • आवाज और होठों के हिलने (Lip-sync) में मामूली देरी.
  • चेहरे के हाव-भाव और शरीर की गतिविधियों में तालमेल की कमी.

सावधानी ही बचाव है

बेंगलुरु पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे डेटिंग ऐप्स पर अजनबियों के साथ बातचीत करते समय बेहद सतर्क रहें. किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ निजी वीडियो कॉल न करें और न ही निजी जानकारी साझा करें. अधिकारियों ने जोर दिया है कि यदि कोई इस तरह के स्कैम में फंस जाता है, तो तुरंत 1930 डायल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करें.