UP Horror: दहेज के लिए पत्नी को पिलाया तेजाब, 23 साल की गल्फिजा की इलाज के दौरान 17 दिन बाद मौत
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अमरोहा (Amroha) जिले से निकली खबर ने एक बार फिर समाज को झकझोर दिया है. 23 साल की गल्फिजा, जिसकी शादी एक साल पहले परवेज से हुई थी, उसके ससुराल वालों ने कथित रूप से दहेज के लिए तेजाब पिलाने पर मजबूर किया.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अमरोहा (Amroha) जिले से निकली खबर ने एक बार फिर समाज को झकझोर दिया है. 23 साल की गल्फिजा, जिसकी शादी एक साल पहले परवेज से हुई थी, उसके ससुराल वालों ने कथित रूप से दहेज के लिए तेजाब पिलाने पर मजबूर किया. पुलिस के अनुसार, ससुराल पक्ष 10 लाख नकद और एक कार की मांग कर रहे थे. 11 अगस्त को जब गल्फिजा को तेजाब पिलाया गया, तब से वह गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती थी. 17 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उसने दम तोड़ दिया. इस मामले में उसके पिता फुरकान ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद परवेज समेत 7 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उन पर दहेज हत्या की धारा भी जोड़ी जाएगी.
निक्की भाटी मामला
अभी ग्रेटर नोएडा की निक्की भाटी का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है और इस नई खौफनाक घटना से लोगों को झकझोर कर रख दिया है. निक्की, जिसकी शादी 2016 में विपिन भाटी से हुई थी, लंबे समय से दहेज की मांग और घरेलू हिंसा झेल रही थी. ससुराल पक्ष लगातार महंगे तोहफ़े, गाड़ियां और नकदी की मांग करता था.
21 अगस्त को झगड़े के दौरान विपिन भाटी ने निक्की को आग लगा दी. अस्पताल में भर्ती रहने के बाद निक्की की मौत हो गई. हालांकि उसने शुरुआती बयान में सिलेंडर फटने की बात कही थी, लेकिन पुलिस जांच में यह झूठ निकला. घर से थिनर की बोतल और लाइटर बरामद हुआ. पुलिस का मानना है कि निक्की ने अपने आखिरी पलों में ससुराल वालों को जेल से बचाने के लिए सच्चाई छिपाई.
समाज पर सवाल और कानून की चुनौती
दोनों घटनाएं साफ दिखाती हैं कि दहेज प्रथा आज भी कितनी गहरी जड़ें जमाए बैठी है. कानून होने के बावजूद महिलाएँ लगातार इसका शिकार हो रही हैं. निक्की और गल्फ़िज़ा जैसी घटनाएँ सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती हैं कि आखिर कब तक बेटियां दहेज की बलि चढ़ती रहेंगी?
प्रशासन और समाज की भूमिका
पुलिस का कहना है कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाएगी, लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब समाज दहेज की कुरीति को पूरी तरह से अस्वीकार करेगा. दहेज माँगना और देना दोनों ही अपराध हैं, लेकिन दुख की बात है कि यह परंपरा आज भी जिंदा है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 28, 2025 11:11 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

