नई दिल्ली: भारत में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अक्सर बहस होती रहती है. लेकिन अब ‘नेशनल एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स (The National Annual Report and Index) ऑन वीमेन सेफ्टी – नारी 2025’ ने जो तस्वीर सामने रखी है, वह चौंकाने वाली है. रिपोर्ट बताती है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाली 40% महिलाएं खुद को सुरक्षित नहीं मानतीं. यह रिपोर्ट 31 शहरों की 12,770 महिलाओं के अनुभवों पर आधारित है. इसमें पाया गया कि साल 2024 में 7% महिलाओं ने छेड़छाड़ जैसी घटनाओं का सामना किया. सबसे ज्यादा खतरे में 18 से 24 साल की युवतियां पाई गईं.
यह आंकड़ा NCRB (National Crime Records Bureau) 2022 के दर्ज मामलों से 100 गुना ज्यादा है. यानी बड़ी संख्या में छेड़छाड़ और उत्पीड़न के मामले अब भी रिपोर्ट ही नहीं होते.
उत्पीड़न किन रूपों में सामने आया?
महिलाओं ने बताया कि उन्हें अक्सर घूरना, उपहास, अश्लील कमेंट्स, भीड़भाड़ में छूना जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा. इन हालात के लिए महिलाओं ने गलियों की खराब रोशनी, कमजोर ढांचा और असुरक्षित पब्लिक ट्रांसपोर्ट को जिम्मेदार ठहराया.
कौन-से शहर सबसे असुरक्षित और कौन-से सबसे सुरक्षित?
- रिपोर्ट में कुछ शहरों को महिलाओं के लिए कम सुरक्षित बताया गया है. इनमें शामिल हैं –
- दिल्ली
- कोलकाता
- रांची
- श्रीनगर
- फरीदाबाद
महिलाओं के लिए ये शहर अपेक्षाकृत सुरक्षित पाए गए
- मुंबई
- कोहिमा
- विशाखापट्टनम
- भुवनेश्वर
- आइजोल
- गंगटोक
- ईटानगर
क्यों नहीं दर्ज होते अपराध?
रिपोर्ट (Women Safety Report) के मुताबिक, सिर्फ 22% महिलाएं ही अपनी समस्या अधिकारियों तक पहुंचाती हैं. बाकी महिलाएं या तो आगे और परेशान किए जाने के डर से या फिर समाज के ताने और बदनामी की वजह से शिकायत दर्ज नहीं करतीं. इसके अलावा, 53% महिलाओं को यह भी पता नहीं था कि उनके कार्यस्थल पर POSH (Prevention of Sexual Harassment) पॉलिसी है या नहीं, जबकि यह कानून द्वारा अनिवार्य है.
रिपोर्ट लॉन्च पर क्या कहा गया?
दिल्ली में रिपोर्ट लॉन्च करते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजय किशोर रहाटकर ने कहा, “यह रिपोर्ट हमें महिलाओं की असली सुरक्षा चिंताओं को समझने में मदद करेगी. हमारा उद्देश्य है कि हर महिला घर, कार्यस्थल, पब्लिक स्पेस और ऑनलाइन स्पेस हर जगह सुरक्षित महसूस करे.”
वहीं, पीवैल्यू एनालिटिक्स के एमडी प्रह्लाद राउत ने कहा, “ये निष्कर्ष सरकारों, कॉर्पोरेट्स और समाज के लिए मार्गदर्शन का काम करेंगे ताकि ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के तहत महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.”













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