UP Budget 2026-27: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार आज, 11 फरवरी 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है. वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना सुबह 11 बजे विधानसभा में यह बजट पेश करेंगे. माना जा रहा है कि यह उत्तर प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट होगा, जिसका कुल आकार 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है. 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यह इस सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है.
कैबिनेट बैठक में प्रस्तावों पर लगेगी मुहर
बजट पेश करने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सुबह 9 बजे राज्य कैबिनेट की बैठक होगी. मुख्यमंत्री आवास पर होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में विधानसभा में रखे जाने वाले बजट प्रस्तावों को औपचारिक मंजूरी दी जाएगी. कैबिनेट द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPCIDA) और लखनऊ मेट्रो के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों को भी हरी झंडी मिलने की संभावना है. यह भी पढ़े: West Bengal Budget 2026: पश्चिम बंगाल में ममता सरकार ने पेश किया 4.06 लाख करोड़ का अंतरिम बजट, जन-कल्याणकारी योजनाओं पर रहा जोर
बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता
इस वर्ष के बजट का मुख्य केंद्र राज्य का बुनियादी ढांचा और क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना है. विशेष रूप से पूर्वांचल और बुंदेलखंड विकास निधि के लिए लगभग 1900 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने की उम्मीद है. इसके साथ ही, एक्सप्रेसवे और मेट्रो परियोजनाओं के विस्तार के लिए भी भारी फंड की व्यवस्था की जा सकती है. सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना है.
युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए बड़ी घोषणाएं
बजट में रोजगार सृजन और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं. सूत्रों के अनुसार, एमएसएमई सेक्टर को नई तकनीक और प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए बड़े फंड का ऐलान हो सकता है. इसके अलावा, सामूहिक विवाह योजना की राशि में वृद्धि और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी नई योजनाओं के शुरू होने की भी संभावना जताई जा रही है. शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी पिछले वर्ष की तुलना में अधिक आवंटन किया जा सकता है.
आर्थिक सर्वेक्षण
9 फरवरी को विधानसभा सत्र के पहले दिन प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, उत्तर प्रदेश अब 'बीमारू' राज्य की श्रेणी से बाहर निकलकर 'ब्रेक थ्रू स्टेट' के रूप में स्थापित हो चुका है. पिछले पांच वर्षों से यूपी एक 'रेवेन्यू सरप्लस' राज्य बना हुआ है, जिससे सरकार को लोक कल्याणकारी योजनाओं में निवेश करने के लिए अतिरिक्त संसाधन मिल रहे हैं.













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