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Inflation Rate In India: गर्मी के चलते बढ़े खाद्य वस्तुओं के दाम, इस साल खुदरा मुद्रास्फीति 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने सोमवार को कहा कि देश में 2022 की शुरुआत में पारा चढ़ना खाद्य वस्तुओं के दाम में तेजी का प्रमुख घरेलू कारण रहा है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति 2022-23 में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है.

Inflation Rate In India: गर्मी के चलते बढ़े खाद्य वस्तुओं के दाम, इस साल खुदरा मुद्रास्फीति 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान

मुंबई, 1 अगस्त: रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने सोमवार को कहा कि देश में 2022 की शुरुआत में पारा चढ़ना खाद्य वस्तुओं के दाम में तेजी का प्रमुख घरेलू कारण रहा है. एजेंसी ने 2021-22 के मुकाबले चालू वित्त वर्ष में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव को देखते हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति 2022-23 में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6.7 प्रतिशत के अनुमान से कुछ अधिक है. Congress MPs Walk Out: संसद में महंगाई पर चर्चा, निर्मला सीतारमण के भाषण के दौरान कांग्रेस ने किया वॉकआउट

आरबीआई मुद्रास्फीति में वृद्धि का प्रमुख कारण रूस-यूक्रेन युद्ध और उससे जिंसों के दाम में तेजी को बताता रहा है. महंगाई दर लगातार रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर (दो से छह प्रतिशत) के ऊपर बनी हुई है. फिलहाल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत है.

क्रिसिल रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर का मुख्य कारण आपूर्ति की कमी है. आपूर्ति कम होने की वजह रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ घरेलू स्तर पर गर्मी का अचानक से बढ़ना है.’’

रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 6.8 प्रतिशत रहेगी. यह खाद्य मुद्रास्फीति के सात प्रतिशत के स्तर पर रहने के अनुमान पर आधारित है.

रिपोर्ट के अनुसार मौद्रिक नीति समिति के समक्ष खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर एक बड़ी चुनौती है. गर्मी के बढ़ने से उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में औसत तापमान 122 साल के उच्चस्तर पर पहुंच गया था. पारा चढ़ने से गेहूं, मूंगफली, बाजरा और आम जैसे फसलों पर असर पड़ा है.

क्रिसिल ने कहा, ‘‘लू चलना प्रमुख घरेलू कारण है जिससे इस साल खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं. यह 2020 के आरबीआई के एक अध्ययन की ओर संकेत देता है. इसमें कहा गया है कि खाद्य मुद्रास्फीति पर जलवायु परिवर्तन का व्यापक आर्थिक प्रभाव पिछले दो दशकों में भारत के लिए सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण रहा है.’’

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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 01, 2022 09:32 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).