तेलंगाना में Anti-Rabies Injection के बाद 2 साल की बच्ची की मौत; विशेषज्ञों से जानें रेबीज वैक्सीन कब हो जाती है बेअसर?

तेलंगाना के कामारेड्डी जिले में एक अत्यंत दुखद घटना सामने आई है, जहां ढाई साल की एक मासूम बच्ची की एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) की तीसरी खुराक लेने के कुछ ही समय बाद मौत हो गई. परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं.

(Photo Credits Pixabay)

कामारेड्डी (तेलंगाना): तेलंगाना के कामारेड्डी जिले में एक अत्यंत दुखद घटना सामने आई है, जहां ढाई साल की एक मासूम बच्ची की एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) की तीसरी खुराक लेने के कुछ ही समय बाद मौत हो गई. परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव व्याप्त हो गया और पुलिस को स्थिति संभालने के लिए मोर्चा संभालना पड़ा.

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, कामारेड्डी के अयप्पा नगर की रहने वाली ढाई वर्षीय कृतर्सा को 25 जनवरी को घर के पास खेलते समय एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था. माता-पिता उसे तुरंत कामारेड्डी के सरकारी सामान्य अस्पताल (GGH) ले गए, जहां उसे एंटी-रेबीज उपचार देना शुरू किया गया. बच्ची को पहली दो खुराकें समय पर दी जा चुकी थीं. यह भी पढ़े;  Mumbai Shocking Video: मुंबई के कांदिवली में दिल दहला देने वाली घटना, सिक्युरिटी गार्ड की पिटाई से डरकर 15वीं मंजिल से गिरा कुत्ता, मौके पर मौत

रविवार (1 फरवरी) को जब माता-पिता उसे तीसरी खुराक के लिए अस्पताल लाए, तो इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद बच्ची बेहोश हो गई. उसे आनन-फानन में एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसकी पल्स (धड़कन) नहीं चल रही है. वापस सरकारी अस्पताल लाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

अस्पताल में भारी हंगामा

बच्ची की मौत की खबर फैलते ही परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने अस्पताल के फर्नीचर और खिड़कियों के कांच तोड़ दिए. परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन किसी अप्रशिक्षित स्टाफ द्वारा लगाया गया था. अस्पताल के अधीक्षक डॉ. वेंकटेश्वरुलु ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि मौत के सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा. पुलिस ने फिलहाल ड्यूटी डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

विशेषज्ञों की राय

रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर सही इलाज से इसे 100% रोका जा सकता है. हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में वैक्सीन का असर कम हो सकता है:

बचाव के लिए क्या करें?

डॉक्टरों के अनुसार, कुत्ते के काटने पर बिना किसी अंधविश्वास के तुरंत सरकारी अस्पताल जाएं. यह सुनिश्चित करें कि डॉक्टर घाव की गंभीरता के अनुसार वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन दोनों दे रहे हैं. साथ ही, टीकाकरण का पूरा कोर्स (0, 3, 7, 14 और 28 दिन) पूरा करना बेहद जरूरी है.

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