VIDEO: झारखंड में मानवता शर्मसार, अस्पताल से शव ले जाने की नहीं मिली सुविधा, नवजात की डेडबॉडी कागज के डिब्बे में  रखकर घर ले जाने को मजबूर हुआ पिता
(Photo Credits Breaking News CKP)

Jharkhand Shocker:  झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है. चाईबासा के चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं और संवेदनशीलता की पोल खुल गई, जब एक बेबस पिता को अपने नवजात शिशु के शव को कागज के एक कार्टन (डिब्बे) में रखकर घर ले जाना पड़ा. अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस या शव वाहन की सुविधा न मिलने के कारण पीड़ित परिवार को इस स्थिति का सामना करना पड़ा.

कागज के डिब्बे में आखिरी सफर

शव ले जाने का कोई साधन न पाकर, बदहवास पिता ने बाजार से एक कागज का खाली डिब्बा खरीदा. उसने अपने जिगर के टुकड़े के शव को उसी डिब्बे में रखा और पैदल ही निकल पड़ा. इस दृश्य ने अस्पताल में मौजूद अन्य लोगों को झकझोर कर रख दिया. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और गरीबों के प्रति प्रशासन के रवैये पर गंभीर सवाल उठाती है.

अस्पताल प्रबंधन की सफाई

इस संवेदनशील मामले पर विवाद बढ़ने के बाद चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. अंशुमन शर्मा ने अपना पक्ष रखा है. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार ने शव ले जाने के लिए अस्पताल प्रबंधन से किसी प्रकार की सहायता या वाहन की मांग नहीं की थी.

डॉ. शर्मा के अनुसार, "अस्पताल में ममता वाहन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध थीं. अगर परिवार हमसे संपर्क करता, तो हम निश्चित रूप से व्यवस्था करते. दुर्भाग्यवश, परिवार ने अपनी समस्या की सूचना हमें नहीं दी और वे स्वयं ही शव लेकर चले गए."

अस्पताल की सफाई

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, कराईकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव के निवासी रामकृष्ण हेम्ब्रम ने अपनी गर्भवती पत्नी रीता तिरिया को प्रसव के लिए तीन दिन पहले चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया था. शनिवार को रीता ने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ ही समय बाद नवजात की मृत्यु हो गई.

परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टरों और स्टाफ की लापरवाही के कारण बच्चे की जान गई. दुख की घड़ी तब और बढ़ गई जब शव को घर ले जाने के लिए कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया.

व्यवस्था पर उठते सवाल

हालांकि अस्पताल प्रबंधन अपनी सफाई दे रहा है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या अस्पताल स्टाफ की यह नैतिक जिम्मेदारी नहीं थी कि वे शोक संतप्त परिवार को शव ले जाने की प्रक्रिया और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी देते? झारखंड के ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली अक्सर ऐसी घटनाओं का कारण बनती है.