Middle East Conflict: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर राज्यसभा में बोले विदेश मंत्री एस. जयशंकर: 'पीएम मोदी स्थिति पर रख रहे हैं कड़ी नजर, भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता'
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर विस्तृत बयान दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्थिति पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं और सरकार कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करने के लिए प्रयासरत है.
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Middle East Conflict: पश्चिम एशिया (West Asia) में गहराते संकट और वहां बढ़ती हिंसा के बीच भारत सरकार (Government of India) ने अपनी चिंता और तैयारियों को लेकर संसद को अवगत कराया है. राज्यसभा में विदेश मंत्री (External Affairs Minister) एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) इस पूरे घटनाक्रम की लगातार समीक्षा कर रहे हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिकों (Indian Citizens) की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. यह भी पढ़ें: 'सबका साथ, सबका विकास' पर आज PM Modi का संबोधन: बजट घोषणाओं के प्रभावी कार्यान्वयन पर होगा मंथन
कूटनीति और बातचीत पर जोर
विदेश मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि तनाव कम करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई, कतर, सऊदी अरब, ओमान, जॉर्डन, इजराइल और बहरीन के राष्ट्राध्यक्षों से बात की है. भारत का स्पष्ट मानना है कि सैन्य संघर्ष का समाधान नहीं निकल सकता, इसलिए बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है. उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया.
भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय
एस. जयशंकर ने रेखांकित किया कि यह संघर्ष भारत के लिए बहुआयामी चुनौतियों वाला है:
- मानवीय पक्ष: खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते हैं। वहीं, ईरान में भी शिक्षा और रोजगार के लिए हजारों भारतीय मौजूद हैं.
- ऊर्जा और अर्थव्यवस्था: पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र है. खाड़ी क्षेत्र के साथ भारत का सालाना व्यापार लगभग 200 बिलियन डॉलर का है.
- समुद्री व्यापार: इस संघर्ष के कारण समुद्री मार्ग (maritime shipping) पर भी असर पड़ा है, जहां कई भारतीय चालक दल के सदस्य (crew members) कार्यरत हैं. दुर्भाग्यवश, इन घटनाओं में दो भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है और एक लापता है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया विवाद पर बात की
My statement in Rajya Sabha today on ‘The Situation in West Asia’ https://t.co/LhetCLKmP8
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) March 9, 2026
Statement in Lok Sabha regarding ‘The Situation in West Asia’. https://t.co/sRXaI20BAT
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) March 9, 2026
भारतीयों के लिए जारी की गई एडवाइजरी
सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए समय-समय पर कदम उठाए हैं. विदेश मंत्री ने बताया कि जून 2025 में तनाव के संकेत मिलने के बाद से ही सरकार सतर्क थी.
- जनवरी 2026 में ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी गई थी.
- 14 फरवरी और 23 फरवरी को भारतीय दूतावास ने नागरिकों को उपलब्ध साधनों से ईरान छोड़ने की सलाह दी थी.
- छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए निकास प्रक्रिया (evacuation) पहले ही शुरू कर दी गई थी.
सदन में विपक्षी दलों का विरोध
राज्यसभा में जब विदेश मंत्री अपना वक्तव्य दे रहे थे, तब सदन में भारी हंगामा देखा गया. नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संघर्ष के दौरान मारे गए भारतीय नागरिकों का मुद्दा उठाने का प्रयास किया, जिसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई. विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच भी विदेश मंत्री ने अपनी बात पूरी की और कहा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 09, 2026 03:39 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

