Balrampur District School: ऐसे पढ़ेगा इंडिया! क्लास के टीचर इंग्लिश में Eleven और Eighteen तक नहीं लिख पाएं, छत्तीसगढ़ में एजुकेशन का हाल बेहाल; VIDEO
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बलरामपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ में शिक्षा का हाल बेहाल है. सरकारी स्कूलें बंद होने की कगार पर है. बच्चों को पढ़ानेवाले शिक्षक ऐसे है, जिन्हें मामूली अंग्रेजी भी नहीं आती. ऐसे शिक्षक बच्चों को क्या ही पढ़ा पाएंगे. अब ये सवाल उठ रहा है. छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले का वीडियो सामने आया है. जहांपर शिक्षक बोर्ड पर अंग्रेजी में इलेवन, एटीन और नाईंनटीन लिख रहे थे, लेकिन इनकी सभी स्पेलिंग गलत थी. जिसके कारण अब सवाल ये उठ रहा है की जब शिक्षक को सही ढंग से अंग्रेजी में नाम लिखना नहीं आता तो ये बच्चों को किस प्रकार से पढ़ाई करवाते होंगे. यहां तक की इन शिक्षकों को राज्य के शिक्षा मंत्री और जिले के डीएम का नाम तक नहीं पता है.

सोशल मीडिया पर इनका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है. इस वीडियो को सोशल मीडिया X पर @VistaarNews नाम के हैंडल से शेयर किया गया है. ये भी पढ़े:Balrampur Teacher Video: शर्मनाक! शराब के नशे में धुत टीचर ने स्कूल के बच्चों के साथ किया डांस, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले का वीडियो आया सामने

शिक्षक नहीं लिख पाएं अंग्रेजी की स्पेलिंग 

खुली एजुकेशन सिस्टम की पोल

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड स्थित प्राथमिक स्कूल घोड़ासोत से जो हालात सामने आए हैं, वे देश की शिक्षा व्यवस्था के खोखलेपन को उजागर करने के लिए काफी हैं. यहां तैनात शिक्षक न तो देश के प्रधानमंत्री का नाम जानते हैं और न ही जिले के कलेक्टर का.इतना ही नहीं, वे साधारण अंग्रेजी शब्दों की स्पेलिंग भी सही नहीं लिख पाए.जब शिक्षकों का ज्ञान इतना कमजोर हो, तो सवाल उठना लाज़मी है कि वे बच्चों को क्या और कैसे सिखाएंगे? शिक्षा सिर्फ उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने या मिड-डे मील बांटने तक सीमित रह जाए, तो यह बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं तो और क्या है?

शिक्षा क्षेत्र की ज़मीनी हकीकत

सरकार हर साल शिक्षा सुधार के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन कागज़ों पर चलने वाली इन योजनाओं का असर गांवों तक पहुंच ही नहीं पाता. घोड़ासोत की यह घटना बताती है कि नीतियों और उनकी क्रियान्वयन प्रक्रिया के बीच भारी अंतर है.शिक्षा एक समाज की नींव होती है.अगर वही कमजोर हो जाए, तो समाज और राष्ट्र दोनों के विकास की गति थम जाती है. घोड़ासोत जैसे उदाहरण यह साफ संकेत देते हैं कि हमारी भावी पीढ़ी को अंधकार की ओर धकेला जा रहा है.