Mangala Kanti Roy Dies: सरिंदा वादक मंगला कांति रॉय का 104 वर्ष की उम्र में निधन, पद्म श्री से सम्मानित कलाकार ने पश्चिम बंगाल में ली अंतिम सांस
मंगला कांति रॉय (Photo Credits: File Image)

कोलकाता, 29 मई: पश्चिम बंगाल (West Bengal) के लोक संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. जलपाईगुड़ी जिले (Jalpaiguri District) के रहने वाले वयोवृद्ध लोक कलाकार और पद्म श्री पुरस्कार (Padma Shri Award) से सम्मानित मशहूर सरिंदा वादक (Sarinda Player) मंगला कांति रॉय (Mangala Kanti Roy) का शुक्रवार (29 मई) की सुबह उनके पैतृक आवास पर निधन हो गया. वे 104 वर्ष के थे. शतायु पार कर चुके यह महान कलाकार पिछले काफी समय से बढ़ती उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं और गले की बीमारी से जूझ रहे थे. वर्ष 2023 में भारत के 74वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार द्वारा उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पार्क श्री' से नवाजा गया था. उनके निधन से राज्य के सांस्कृतिक और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. यह भी पढ़ें: Ramakant Daayama Passes Away: 'चक दे! इंडिया' अभिनेता रमाकांत दायमा का 69 वर्ष की आयु में निधन; अभिनेत्री शुभांगी लाटकर ने नम आंखों से कहा- 'एक खूबसूरत आत्मा को खो दिया'

पैतृक आवास पर ली अंतिम सांस; गले की बीमारी से थे पीड़ित

मंगला कांति रॉय ने जलपाईगुड़ी जिले के मयनागुड़ी ब्लॉक के अंतर्गत आमगुड़ी पंचायत के धौलागिरी गांव स्थित अपने पैतृक निवास पर अंतिम सांस ली। उनके परिवार में उनकी पत्नी, तीन बेटे और पोते-पोतियां हैं.

कलाकार के बेटे उमाकांत रॉय ने पिता के निधन की पुष्टि करते हुए मीडिया को बताया कि वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। शुरुआत में उनका इलाज मयनागुड़ी ग्रामीण अस्पताल में कराया गया और बाद में उन्हें जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था. कुछ दिनों पहले ही इलाज के बाद वे घर लौटे थे, लेकिन गले की अत्यधिक समस्या के कारण पिछले कुछ दिनों से उन्होंने भोजन करना बेहद कम कर दिया था, जिसके बाद आज तड़के उनका निधन हो गया.

500 साल पुराने 'सरिंदा' वाद्ययंत्र को दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

मंगला कांति रॉय को पश्चिम बंगाल की विलुप्त हो रही लोक कला और पारंपरिक वाद्ययंत्र 'सरिंदा' (Sarinda) को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है. सरिंदा मुख्य रूप से उत्तर बंगाल के लोक कलाकारों द्वारा बजाया जाने वाला लगभग 500 वर्ष पुराना एक दुर्लभ तंत्री वाद्ययंत्र (Stringed Instrument) है, जो काफी हद तक सारंगी जैसा दिखता है.

अपनी अद्भुत कला के दम पर उन्होंने इस लुप्तप्राय वाद्ययंत्र की धुन को दुनिया भर के संगीत प्रेमियों तक पहुँचाया. पश्चिम बंगाल के कला जगत का मानना है कि मंगला कांति रॉय के जाने से राज्य के लोक संगीत के एक सुनहरे युग का अंत हो गया है.

'बंग रत्न' और 'पदम श्री' से हुए थे सम्मानित

मंगला कांति रॉय के असाधारण सांस्कृतिक योगदान को देखते हुए वर्ष 2017 में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उन्हें "बंग रत्न" (Banga Ratna) पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. इसके बाद, लोक संगीत के क्षेत्र में उनके अद्वितीय समर्पण को देखते हुए वर्ष 2023 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित "पद्म श्री" (Padma Shri) पुरस्कार से विभूषित किया था.