देश

करवा चौथ सभी महिलाओं के लिए हो अनिवार्य... अजीबोगरीब याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें मांग की गई थी कि करवा चौथ का पर्व सभी महिलाओं- विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं के लिए अनिवार्य किया जाए.

करवा चौथ सभी महिलाओं के लिए हो अनिवार्य... अजीबोगरीब याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
Supreme Court | PTI

नई दिल्ली: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें मांग की गई थी कि करवा चौथ का पर्व सभी महिलाओं- विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं के लिए अनिवार्य किया जाए. इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने न केवल खारिज किया बल्कि इसे "फिजूल" और "प्रेरित" करार देते हुए याचिकाकर्ता को फटकार भी लगाई. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें याचिका खारिज कर दी गई थी और याचिकाकर्ता पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था. कोर्ट ने कहा, "ऐसी याचिकाएं वे लोग फंड करते हैं जो खुद सामने नहीं आते."

खुद मुसीबत को न्योता दिया... इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पीड़ित महिला को बताया रेप के लिए जिम्मेदार; आरोपी को दी जमानत.

धार्मिक परंपरा को बाध्य बनाना स्वतंत्रता का उल्लंघन

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि करवा चौथ एक निजी और धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व है, और इसे सभी महिलाओं पर थोपना न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता, बल्कि धार्मिक आस्था की भावना के भी खिलाफ है. कोर्ट ने कहा कि कोई भी कानूनी प्रावधान ऐसा नहीं है जो इस त्योहार को अनिवार्य बना सके.

याचिकाकर्ता की अजीब दलील

याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार मल्होत्रा ने यह दलील दी कि विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं को करवा चौथ का व्रत रखने से रोका जाता है, जो उनके साथ भेदभाव है. उन्होंने केंद्र और हरियाणा सरकार से कानून में संशोधन कर इसे सभी के लिए अनिवार्य करने की मांग की थी. साथ ही उन्होंने यह भी प्रस्ताव दिया कि अगर कोई महिला को करवा चौथ मनाने से रोके, तो उसे दंडनीय अपराध माना जाए.

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने खारिज की याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले ही इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह मुद्दा विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि अदालत के. लेकिन जब याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में फिर से याचिका डाली, तो कोर्ट ने उसे सख्ती से खारिज करते हुए कहा कि अगर भविष्य में फिर से ऐसी याचिका दायर की गई, तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

(The above story first appeared on LatestLY on May 20, 2025 04:56 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).