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खुद मुसीबत को न्योता दिया... इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पीड़ित महिला को बताया रेप के लिए जिम्मेदार; आरोपी को दी जमानत

इलाहाबाद हाई कोर्ट का एक हालिया फैसला रेप जैसे संवेदनशील मामलों में न्यायिक सोच और महिला अधिकारों को लेकर एक बार फिर बहस का कारण बन गया है. दरअसल कोर्ट ने रेप के आरोपी को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की कि “महिला ने खुद ही मुसीबत को न्योता दिया.”

खुद मुसीबत को न्योता दिया... इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पीड़ित महिला को बताया रेप के लिए जिम्मेदार; आरोपी को दी जमानत
Representational Image | Pixabay

इलाहाबाद हाई कोर्ट का एक हालिया फैसला रेप जैसे संवेदनशील मामलों में न्यायिक सोच और महिला अधिकारों को लेकर एक बार फिर बहस का कारण बन गया है. दरअसल कोर्ट ने रेप के आरोपी को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की कि “महिला ने खुद ही मुसीबत को न्योता दिया.”

जस्टिस संजय कुमार सिंह ने निश्चल चंदक नामक आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि अगर महिला के आरोप सही भी मान लिए जाएं, तब भी वह खुद इस घटना के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार है. कोर्ट ने पीड़िता की शैक्षणिक योग्यता की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह एक पोस्टग्रेजुएट छात्रा है और इसलिए उसे अपने कार्यों के नैतिक और सामाजिक परिणाम समझने चाहिए थे.

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क्या है पूरा मामला

महिला ने 23 सितंबर 2024 को एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि 21 सितंबर की रात एक बार में शराब पीने के बाद, आरोपी उसे अपने रिश्तेदार के फ्लैट पर ले गया, जहां उसने दो बार उसके साथ बलात्कार किया. पीड़िता का कहना है कि वह बहुत अधिक नशे में थी और सोने के लिए आरोपी के घर जा रही थी, लेकिन उसे धोखे से दूसरी जगह ले जाया गया.

कोर्ट की विवादित टिप्पणी

कोर्ट ने जमानत देते समय यह तर्क दिया कि पीड़िता ने स्वेच्छा से शराब का सेवन किया, वह रात 3 बजे तक बार में रही और बाद में आरोपी के साथ गई, इसलिए उसने खुद ही मुसीबत को आमंत्रित किया. इस टिप्पणी पर कई सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

आरोपी को क्यों मिली जमानत

कोर्ट ने माना कि मेडिकल जांच में पीड़िता का हाइमन फटा हुआ पाया गया, लेकिन डॉक्टर ने बलात्कार को लेकर कोई स्पष्ट राय नहीं दी. साथ ही, आरोपी ने संबंध को आपसी सहमति का मामला बताया और यह भी कहा कि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने कहा कि यह जमानत देने लायक मामला है.

राज्य सरकार ने आरोपी की जमानत का विरोध तो किया, लेकिन पीड़िता द्वारा बार में जाने और नशे की हालत में आरोपी के साथ जाने जैसे बिंदुओं का खंडन नहीं किया. इससे अदालत को आरोपी की दलीलों को मान्यता देने का आधार मिल गया.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 11, 2025 08:40 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).