Asaram Gets Bail: जोधपुर (Jodhpur)के सेंट्रल जेल में बंद आसाराम (Asaram ) बापू को बीमारी के इलाज के लिए राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) से 6 महीने की अंतरिम जमानत (Bail) मिली है.बता दें की आसाराम वर्तमान में जोधपुर सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं, लेकिन हाल में उनकी तबीयत लगातार खराब होती जा रही थी, जिसके चलते उन्होंने इलाज के लिए जमानत की अर्जी दाखिल की थी.फिलहाल आसाराम का इलाज एक निजी हॉस्पिटल में चल रहा है. कोर्ट में दी गई याचिका में कहा गया कि उन्हें हृदय से जुड़ी समस्याएं, उम्रजनित बीमारियां और कमजोरी जैसी कई दिक्कतें हैं. इसी आधार पर उन्होंने अस्थायी जमानत मांगी थी ताकि उन्हें बेहतर इलाज मिल सके.
इसका वीडियो (Video) भी सामने आया है. जहां वे जेल से बाहर निकल रहे है. इस वीडियो को सोशल मीडिया X पर @GreateRajasthan नाम के हैंडल से शेयर किया गया है. ये भी पढ़े:आसाराम बापू को मिली अंतरिम जमानत, बीमारी के आधार पर कोर्ट का फैसला
आसाराम को मिली जमानत
जोधपुर हाईकोर्ट ने आसाराम को स्वास्थ्य कारणों और बढ़ती उम्र को देखते हुए 6 महीने की अंतरिम जमानत दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। #Asaram #JodhpurHighCourt #InterimBail #RajasthanNews pic.twitter.com/jrMpiZ6E2D
— Great Rajasthan News (@GreateRajasthan) October 29, 2025
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दी मंजूरी
राजस्थान हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि असाराम जमानत की अवधि में न तो सबूतों के साथ छेड़छाड़ करेंगे और न ही अपने अनुयायियों से संपर्क रखेंगे.
2013 से जेल में बंद हैं आसाराम
आसाराम को अगस्त 2013 में गिरफ्तार किया गया था, जब जोधपुर (Jodhpur) स्थित उनके आश्रम की एक 16 वर्षीय छात्रा ने यौन शोषण का आरोप लगाया था. छात्रा के माता-पिता उनके अनुयायी थे और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी.लगभग पांच साल चली सुनवाई के बाद 2018 में जोधपुर की अदालत ने असाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. अदालत ने उन्हें पोक्सो (POCSO) एक्ट, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और आईपीसी (IPC)की कई धाराओं के तहत दोषी पाया था.अहमदाबाद और सूरत के आश्रमों में भी असाराम और उनके बेटे नारायण साईं पर यौन शोषण के गंभीर आरोप हैं. जनवरी 2023 में गांधीनगर की अदालत ने उन्हें दो बहनों से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया था. इसमें एक बहन ने खुद आसाराम पर आरोप लगाया, जबकि दूसरी ने उनके बेटे पर.
वकीलों की दलीलें और कोर्ट का रुख
इस जमानत याचिका में आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने पैरवी की, जबकि सरकार का पक्ष दीपक चौधरी ने रखा और पीड़िता की ओर से पी.सी. सोलंकी उपस्थित रहे. अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अस्थायी राहत उचित है.इससे पहले जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी आसाराम को इलाज के लिए कुछ समय की अंतरिम जमानत दी थी.उस समय कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि आसाराम अपने अनुयायियों से संपर्क न रखें और मामले के साक्ष्यों को प्रभावित न करें.
कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी
राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) की यह राहत अस्थायी है और सिर्फ छह महीनों के लिए दी गई है. इस अवधि के बाद अदालत को रिपोर्ट दी जाएगी और आगे के निर्णय उसी के आधार पर होंगे. फिलहाल, आसाराम की सेहत में सुधार और कानून के दायरे में उनका व्यवहार ही आने वाले समय की दिशा तय करेगा.













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