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Pune News: पुणे में चलना हुआ मुश्किल! ट्रैफिक जाम में भारत में दूसरे और दुनिया में पांचवें स्थान पर

टॉमटॉम की ताजा ट्रैफिक इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, पुणे दुनिया का पांचवां और भारत का दूसरा सबसे भीड़भाड़ वाला शहर बन गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पुणे में 10 किमी की दूरी तय करने में औसतन 33 मिनट से अधिक का समय लग रहा है.

Pune News: पुणे में चलना हुआ मुश्किल! ट्रैफिक जाम में भारत में दूसरे और दुनिया में पांचवें स्थान पर
(Photo Credits ANI

 Pune News: हालिया निकाय चुनावों में ट्रैफिक जाम का मुद्दा प्रमुखता से छाए रहने के बावजूद, पुणे शहर को यातायात की समस्या से राहत मिलती नहीं दिख रही है. नीदरलैंड स्थित लोकेशन टेक्नोलॉजी फर्म 'टॉमटॉम' (TomTom) द्वारा जारी 'ट्रैफिक इंडेक्स 2025' की रिपोर्ट के अनुसार, पुणे दुनिया का पांचवां सबसे अधिक ट्रैफिक जाम वाला शहर बन गया है. राष्ट्रीय स्तर पर, पुणे भारत का दूसरा सबसे अधिक भीड़भाड़ वाला शहर है, जबकि बेंगलुरु इस सूची में देश में पहले और दुनिया में दूसरे स्थान पर है.

10 किमी चलने में लगते हैं 33 मिनट से ज्यादा

टॉमटॉम की रिपोर्ट के आंकड़ों से पता चलता है कि पुणे में वाहन चालकों को औसतन 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में 33 मिनट और 20 सेकंड का समय लग रहा है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि व्यस्त समय (Peak Hours) के दौरान वाहनों की औसत गति घटकर मात्र 15.1 किमी प्रति घंटा रह जाती है. शहर में औसत कंजेशन लेवल 71.1 प्रतिशत दर्ज किया गया है. यह भी पढ़े:  Pune Grand Tour 2026: पुणे में अंतरराष्ट्रीय साइकिलिंग प्रतियोगिता का आयोजन, शहर में 23 जनवरी को कई प्रमुख सड़कें रहेंगी बंद; घर से निकलने से पहले चेक करें रूट

वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग

साल 2025 की इस रिपोर्ट में मेक्सिको सिटी को दुनिया का सबसे अधिक भीड़भाड़ वाला शहर बताया गया है. इसके बाद बेंगलुरु दूसरे स्थान पर है. भारत के शीर्ष 10 सबसे भीड़भाड़ वाले शहरों की सूची इस प्रकार है:

  1. बेंगलुरु

  2. पुणे

  3. मुंबई

  4. नई दिल्ली

  5. कोलकाता

  6. जयपुर

  7. चेन्नई

  8. हैदराबाद

  9. एर्नाकुलम

  10. अहमदाबाद

सार्वजनिक परिवहन की कमी और बढ़ती निजी गाड़ियां

विशेषज्ञों का मानना है कि पुणे में ट्रैफिक जाम का मुख्य कारण सार्वजनिक परिवहन प्रणाली (Public Transport) का बेहद कमजोर होना है. शहर की आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से पुणे को लगभग 4,500 बसों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में केवल 2,000 बसें ही संचालित की जा रही हैं.

'परिसर' संस्था के निदेशक रंजीत गाडगिल ने बताया कि केवल चौड़ी सड़कें और फ्लाईओवर बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा. जब तक सार्वजनिक परिवहन को मजबूत नहीं किया जाता और निजी वाहनों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए पार्किंग नीति जैसे सख्त कदम नहीं उठाए जाते, तब तक वाहनों की संख्या बढ़ती रहेगी.

समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण की मांग

स्थानीय नागरिकों और यातायात विशेषज्ञों ने केंद्र और राज्य सरकार से इस दिशा में वैज्ञानिक और दीर्घकालिक उपाय करने का आग्रह किया है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सार्वजनिक परिवहन में सुधार और बुनियादी ढांचे का विस्तार नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर शहर के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय विकास पर पड़ेगा.

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2024 की तुलना में पुणे की रैंकिंग में मामूली सुधार हुआ है; पिछले साल पुणे दुनिया का चौथा सबसे धीमा शहर था, जो इस साल पांचवें स्थान पर आ गया है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 22, 2026 04:27 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).