Power struggle in Baramati: बारामती में 'पवार बनाम पवार' की अगली जंग? जय पवार के बयान ने तीसरी पीढ़ी के उत्तराधिकार की बहस को दी हवा
महाराष्ट्र की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक विरासत 'पवार परिवार' में उत्तराधिकार की लड़ाई अब तीसरी पीढ़ी तक पहुंच गई है. जय पवार के हालिया बयान ने 2029 के विधानसभा चुनाव के लिए परिवार के भीतर ही नई प्रतिस्पर्धा और कयासों को जन्म दे दिया है.
बारामती, 25 अप्रैल: महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra Politics) का केंद्र माने जाने वाले बारामती (Baramati) में एक बार फिर आंतरिक उथल-पुथल तेज हो गई है. उपमुख्यमंत्री अजीत पवार (Deputy Chief Minister Ajit Pawar) के छोटे बेटे, जय पवार (Jai Pawar) के एक ताजा बयान ने पवार परिवार (Pawar Family) के भीतर उत्तराधिकार की जंग (Battle for Succession) को नई दिशा दे दी है. जय पवार ने गुरुवार को कहा, 'बारामती के लोग चाहते हैं कि मैं 2029 का विधानसभा चुनाव लड़ूं.' उनके इस बयान ने राज्य के सबसे बड़े राजनीतिक घराने में 'भाई बनाम भाई' के नैरेटिव को फिर से चर्चा में ला दिया है. यह भी पढ़ें: Baramati Assembly By-Election 2026: भावुक अपील के साथ सुनेत्रा पवार ने डाला वोट, कहा- 'दादा' के विकास कार्यों का फल देगी जनता (Watch Videos)
मैदान में तीसरी पीढ़ी के चार चेहरे
बारामती की राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए पवार परिवार की तीसरी पीढ़ी के चार नाम प्रमुखता से उभर रहे हैं. स्थानीय गलियारों में अब यही सवाल है कि भविष्य में बारामती का नेतृत्व कौन करेगा:
- रोहित पवार: शरद पवार गुट (NCP-SP) के विधायक.
- पार्थ पवार: अजीत पवार के बड़े बेटे और पूर्व सांसद.
- युगेंद्र पवार: अजीत पवार के भतीजे, जिन्होंने पिछला चुनाव लड़ा था.
- जय पवार: अजीत पवार के छोटे बेटे, जिन्होंने अब अपनी दावेदारी पेश की है.
रोहित और पार्थ की अलग-अलग रणनीतियां
रोहित पवार वर्तमान में कर्जत-जामखेड़ से विधायक हैं, लेकिन बारामती में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है. उन्होंने हाल ही में बारामती उपचुनाव के दौरान विपक्षी एकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रोहित का कहना है कि बारामती उनकी राजनीतिक नींव है और वह इसे कभी नहीं भूल सकते.
वहीं, पार्थ पवार पर्दे के पीछे से अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं. हालांकि, उनके कुछ कड़े बयानों के कारण उन्हें सार्वजनिक रैलियों से थोड़ा दूर रखा गया था, लेकिन वे चुनावी मशीनरी और प्रबंधन को संभालने में जुटे हुए हैं.
युगेंद्र का संयम और जय की महत्वाकांक्षा
पिछला विधानसभा चुनाव अजीत पवार के खिलाफ लड़ने वाले युगेंद्र पवार हार के बावजूद लगातार जनता के बीच बने हुए हैं. हालांकि, परिवार के भीतर बढ़ते मतभेदों पर उन्होंने संयमित रुख अपनाते हुए कहा है कि यह आपसी संघर्ष का समय नहीं है और भाइयों के बीच विवाद पैदा नहीं करना चाहिए.
दूसरी ओर, जय पवार का 2029 के लिए सीधा दावा उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाता है. उनके इस बयान ने परिवार के स्थापित क्रम को चुनौती दी है और यह संकेत दिया है कि भविष्य में बारामती की सीट के लिए एक और 'पवार बनाम पवार' मुकाबला देखने को मिल सकता है. यह भी पढ़ें: Sunetra Pawar Files Nomination By-Election: सुनेत्रा पवार ने बारामती उपचुनाव के लिए दाखिल किया नामांकन, अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई है सीट; VIDEO
विरासत की व्यक्तिगत जंग
जैसे-जैसे 2029 का समय नजदीक आ रहा है, बारामती के मतदाता खुद को एक दोराहे पर पा रहे हैं. पवार वंश के चार पोते अब प्रभाव के लिए एक-दूसरे के आमने-सामने हैं. यह लड़ाई अब केवल पार्टी की राजनीति तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह परिवार की विरासत को बचाने और उसे आगे बढ़ाने का एक बेहद व्यक्तिगत संघर्ष बन गई है.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 25, 2026 01:01 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

