Thackeray Reunite For Ganesh Chaturthi: गणपति बप्पा ने दूर किए गिले-शिकवे! 20 साल बाद भाई राज के घर पहुंचे उद्धव ठाकरे

मुंबई: कहते हैं गणपति बप्पा 'विघ्नहर्ता' हैं, यानी सारी मुश्किलें दूर करने वाले. मुंबई (Mumbai) में गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2025) के दिन उन्होंने यह बात सच साबित कर दी. इस साल होने वाले निकाय चुनावों से पहले, बप्पा ने सालों से अलग चल रहे चचेरे भाइयों, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को एक दूसरे के करीब ला दिया.

बुधवार सुबह, शिव सेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) अपने चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे (Raj Thackeray) के घर  'शिवतीर्थ' पहुंचे, जहां गणपति पूजा के लिए उनका स्वागत किया गया.

महाराष्ट्र की राजनीति में यह एक बड़ी घटना है. दशकों से राज्य की राजनीति बालासाहेब ठाकरे के इर्द-गिर्द घूमती रही है. ऐसे में  उद्धव ठाकरे का राज ठाकरे के घर जाना एकजुटता का एक बड़ा सार्वजनिक संदेश था.

आपको बता दें कि राज ठाकरे जुलाई में 13 साल बाद मातोश्री गए थे, लेकिन उद्धव का राज के घर जाना इस रिश्ते में जमी बर्फ के पिघलने का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है.

क्यों आई थी रिश्तों में दरार?

दोनों भाइयों के बीच नवंबर 2005 में राजनीतिक मतभेदों के कारण अलगाव हो गया था. इसके बाद लगभग 20 सालों तक, वे एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बने रहे और बालासाहेब ठाकरे की विरासत के लिए संघर्ष करते रहे. हालांकि, बालासाहेब के बेटे होने के नाते उद्धव को ही हमेशा उनकी विरासत का असली वाहक माना गया.

कैसे शुरू हुई नजदीकियां?

इन दोनों भाइयों के बीच रिश्ते तब सुधरने शुरू हुए जब बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने कक्षा 1 से 5 तक मराठी को अनिवार्य करने का आदेश दिया था (जिसे बाद में रद्द कर दिया गया). इस आदेश का विरोध करने का श्रेय दोनों भाइयों ने मिलकर लिया और यहीं से उनकी नजदीकियां बढ़ने लगीं. इसके बाद दोनों ने मुंबई निकाय चुनाव एक साथ लड़ने की योजना की घोषणा की, जिससे उनके गठबंधन की खबरें और पक्की हो गईं.

हालिया तनाव और आज का संदेश

पिछले हफ्ते राज ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच हुई एक अचानक मुलाकात के बाद कुछ खटास की खबरें आई थीं. यह मुलाकात ठीक उस दिन हुई थी जब ठाकरे बंधुओं के समर्थित उम्मीदवारों को एक यूनियन चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. इस हार के बाद फडणवीस ने कहा था कि 'ठाकरे ब्रांड' को खारिज कर दिया गया है.

हालांकि, राज ठाकरे ने इन अटकलों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ उनकी मुलाकात शहर की योजना से जुड़े मुद्दों पर थी, जो हमेशा से उनकी रुचि का विषय रहा है. और अब गणेश चतुर्थी पर एक-दूसरे के घर जाकर दोनों भाइयों ने यह संदेश साफ कर दिया है कि वे अब भी साथ हैं.

बीजेपी का क्या कहना है? 

भारतीय जनता पार्टी (BJP) बार-बार कह रही है कि उसे इस गठबंधन से कोई फर्क नहीं पड़ता. सोमवार को पार्टी के नवनियुक्त मुंबई इकाई के अध्यक्ष, अमित साटम ने कहा, "लोगों का एक साथ आना महत्वपूर्ण नहीं है. मुंबई के लोगों ने देखा है कि उनके लिए किसने काम किया है. विकास ज्यादा महत्वपूर्ण है."