Vijay Shah Remarks on Colonel Sophia Qureshi: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मंत्री कुंवर विजय शाह को करारा झटका दिया है. कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की और इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सीनियर आईपीएस अधिकारियों वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया. ये मामला तब सामने आया जब विजय शाह ने हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान मीडिया को जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी पर एक विवादित बयान दे डाला.
शाह ने कहा था, “जिन्होंने हमारी बेटियों को विधवा किया, हमने उन्हें सबक सिखाने के लिए उनकी ही एक बहन को भेजा.” इस बयान को सीधे तौर पर कर्नल कुरैशी को 'आतंकियों की बहन' बताने जैसा देखा गया.
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सुप्रीम कोर्ट ने BJP मंत्री विजय शाह को लगाई फटकार
Supreme Court slams Cabinet Minister Kunwar Vijay Shah for his remarks against Indian Army officer Colonel Sofiya Qureshi, who had briefed the media about Operation Sindoor against Pakistan. Supreme Court says it is not ready to accept the apology tender by the minister.
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— ANI (@ANI) May 19, 2025
शाह की माफी को SC ने किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटेश्वर सिंह की बेंच ने साफ किया कि SIT में तीन IPS अफसर होंगे, जिनमें से एक महिला अधिकारी होंगी और टीम की अगुवाई IG या DGP रैंक का अफसर करेगा. साथ ही ये अधिकारी मध्य प्रदेश से बाहर के होंगे ताकि निष्पक्ष जांच हो सके. कोर्ट ने कहा, “यह राज्य की साख का टेस्ट है.”
कोर्ट ने फिलहाल विजय शाह की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें जांच में सहयोग करने को कहा है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शाह की ओर से दी गई माफी को भी खारिज कर दिया और कहा, “आपने जो बोला है, वह बेहद घटिया और सोच से परे है. हम आपकी माफी नहीं चाहते.”
HC के आदेश के बाद दर्ज हुआ था FIR
मामले की शुरुआत मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से हुई थी, जिसने 14 मई को स्वतः संज्ञान लेते हुए इस पर आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे. कोर्ट ने साफ कहा था कि शाह ने “गटरछाप जैसी भाषा” का इस्तेमाल किया. यह न सिर्फ एक अफसर के सम्मान पर हमला है, बल्कि भारतीय सेना का भी अपमान है.
इसके बाद FIR दर्ज की गई थी. इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि FIR को जानबूझकर कमजोर तरीके से लिखा गया है, ताकि बाद में इसे खत्म किया जा सके.
पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट की नजर
अब सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस मामले पर नजर रखने का निर्णय लिया है और कहा कि SIT की पहली रिपोर्ट कोर्ट में अवकाश सत्र की पहली सुनवाई में पेश की जाए. यह मामला अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है.
एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि राजनीतिक बयानबाजी की भी कोई सीमा होनी चाहिए. खासकर जब देश की सेना और उनके अधिकारी सवालों के घेरे में हों.













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