नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में नीदरलैंड के एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान की भूमिका और सोच पर बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी, उसी ने भारत-पाक के बीच इस महीने हुए सैन्य टकराव की नींव रखी.
आतंकवाद और धार्मिक कट्टरता का मेल
जयशंकर ने कहा कि इस हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों ने टूरिस्ट्स की पहचान पूछकर उन्हें मारा, यानी धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया. यह हमला ना केवल इंसानियत के खिलाफ था, बल्कि इसका मकसद घूमने-फिरने की जगहों को नुकसान पहुंचाना और धार्मिक तनाव बढ़ाना भी था.
उन्होंने कहा कि इस हमले के पीछे पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की धार्मिक कट्टर सोच का सीधा असर था. असीम मुनीर को हाल ही में जनरल से फील्ड मार्शल बनाया गया है. जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तानी सेना का नेतृत्व धार्मिक कट्टरता से प्रेरित है, और ये बातें आतंकियों के कामकाज में भी साफ दिखती हैं.
ट्रंप की मध्यस्थता की बात खारिज
जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 मई को हुए युद्धविराम में मध्यस्थता की, तो उन्होंने इसे सिरे से नकार दिया. जयशंकर ने साफ किया कि यह फैसला भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे तौर पर हुआ, किसी तीसरे देश की इसमें कोई भूमिका नहीं थी.
पाकिस्तान की मिलीभगत पर सबूत
एक अन्य इंटरव्यू में, जयशंकर ने यह भी कहा कि यह सोचना गलत है कि पाकिस्तान की सरकार को अपनी जमीन पर चल रहे आतंकी कैंपों की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, "सबसे कुख्यात आतंकवादी जैसे हाफिज सईद और मसूद अजहर पाकिस्तान में ही खुलेआम घूमते हैं. उनके ठिकाने, गतिविधियां और आपसी संपर्क सब कुछ दुनिया को पता हैं."
जयशंकर ने यह भी कहा कि "पाकिस्तानी सेना खुद आतंकियों की मदद करती है - पैसे से, ट्रेनिंग से, और हथियारों से."
ऑपरेशन सिंदूर: भारत की सख्त प्रतिक्रिया
पहलगाम हमले के बाद भारत ने केवल कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि “ऑपरेशन सिंदूर” नाम से एक सैन्य अभियान भी शुरू किया. इसमें पाकिस्तान और पीओके (पाक-अधिकृत कश्मीर) में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए. जवाब में पाकिस्तान ने सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें भारत पर दागीं, लेकिन भारत की एयर डिफेंस ने ज्यादातर को नाकाम कर दिया.
भारत के जवाबी हमलों में पाकिस्तान के कई एयरबेस और रडार सिस्टम निष्क्रिय कर दिए गए. इसके बाद ही पाकिस्तान ने युद्धविराम की बात की.
आगे क्या?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है. भारत अब एक नई नीति के तहत काम कर रहा है – अगर भविष्य में कोई और आतंकी हमला होता है, तो जवाब और भी कड़ा होगा.
भारत ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान को पहले अपने आतंकी ढांचे को खत्म करना होगा और पीओके को भारत को लौटाना होगा, तभी कोई शांतिपूर्ण बातचीत हो सकती है.
एस. जयशंकर के बयान साफ दिखाते हैं कि भारत अब न सिर्फ आतंकवाद पर सख्त है, बल्कि उसकी जड़ – यानी पाकिस्तान के भीतर के आतंकी समर्थन पर भी खुलकर बोल रहा है. यह रुख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा सकता है.













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