वॉशिंगटन: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S Jaishankar) अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर अमेरिका (US) पहुंच चुके हैं. मंगलवार, 3 फरवरी 2026 को वह वॉशिंगटन डीसी में अपने अमेरिकी समकक्ष और नवनियुक्त विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक करेंगे. यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब मात्र 24 घंटे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के बीच हुई बातचीत ने भारत-अमेरिका व्यापारिक गतिरोध को समाप्त कर एक नई ‘ट्रेड डील’ का मार्ग प्रशस्त किया है. यह भी पढ़ें: भारत-अमेरिका ट्रेड डील: ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर किया 18%, रूसी तेल आयात बंद करने पर बनी सहमति
ट्रंप-मोदी डील के बाद पहली हाई-लेवल मीटिंग
सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की थी कि भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है, जिसके बदले में अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर रहा है.
जयशंकर और रुबियो की आज की मुलाकात इस समझौते को जमीन पर उतारने और रक्षा, ऊर्जा तथा तकनीक के क्षेत्र में अगले कदमों पर चर्चा करने के लिए बेहद अहम मानी जा रही है. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर इस डील का स्वागत करते हुए इसे 'मेक इन इंडिया' के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बताया है.
क्रिटिकल मिनरल्स और सामरिक सहयोग
बुधवार को विदेश मंत्री 'क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टरियल' (Critical Minerals Ministerial) में भाग लेंगे, जिसकी मेजबानी मार्को रुबियो कर रहे हैं. इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य:
- आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में सुधार: सेमीकंडक्टर और ईवी बैटरी जैसे भविष्य के उद्योगों के लिए जरूरी खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करना.
- चीन पर निर्भरता कम करना: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खनिजों के लिए किसी एक देश पर निर्भरता कम करने के लिए सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम करना.
- स्वच्छ ऊर्जा: क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन के लिए आवश्यक संसाधनों पर रणनीतिक सहयोग बढ़ाना.
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर मंथन
द्विपक्षीय वार्ता के दौरान केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति पर भी चर्चा होने की संभावना है. इसमें यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के ट्रंप प्रशासन के प्रयासों, मध्य पूर्व (Middle East) की स्थिति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल होंगे. जयशंकर अमेरिकी प्रशासन के अन्य वरिष्ठ सदस्यों और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से भी मुलाकात कर सकते हैं.
पिछले कुछ महीनों के तनाव के बाद, जयशंकर का यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों में एक "रीसेट" (Reset) के रूप में देखा जा रहा है. 'क्रिटिकल मिनरल्स' और नए व्यापारिक समझौतों के जरिए दोनों लोकतांत्रिक देश अपनी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में बढ़ रहे हैं.












QuickLY