PM Modi Baisakhi Wishes: पीएम मोदी ने देशवासियों को दी बैसाखी की शुभकामनाएं, कहा- नया उत्साह, नई ऊर्जा और समृद्धि लाए यह पर्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैसाखी के शुभ अवसर पर देशवासियों को हार्दिक बधाई दी है. उन्होंने अपने संदेश में नए उत्साह, खुशहाली और एकता की कामना की। यह पर्व खेती-किसानी, खालसा पंथ स्थापना और सामाजिक समरसता का प्रतीक है.
Happy Baisakhi 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैसाखी के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं. एक खूबसूरत कार्ड के माध्यम से उन्होंने सभी को इस पर्व की बधाई देते हुए लिखा, "Wishing everyone a joyous Baisakhi!" यानी “सभी को उल्लासपूर्ण बैसाखी की शुभकामनाएं!”
इस शुभकामना संदेश में उन्होंने आगे कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में नई आशा, खुशी और समृद्धि लेकर आए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हम सभी हमेशा एकता, कृतज्ञता और नवीकरण की भावना के साथ इस पर्व को मनाते रहें.
पीएम मोदी के इस संदेश में एक डोल (पंजाबी ढोल), गेहूं की बालियां और रंग-बिरंगे पारंपरिक डिजाइन नजर आ रहे हैं, जो पंजाब और हरियाणा की खेती-किसानी संस्कृति का प्रतीक हैं. इस चित्र के जरिए न सिर्फ किसानों के परिश्रम को सम्मान दिया गया है, बल्कि देश की समृद्ध परंपराओं को भी दर्शाया गया है.
बैसाखी का महत्व
बैसाखी मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है, जो रबी फसल की कटाई के समय आता है. यह पर्व किसानों के लिए धन्यवाद और खुशी का प्रतीक होता है. साथ ही, यह सिख समुदाय के लिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन 1699 में श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी.
बैसाखी मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है. इस दिन लोग पारंपरिक पंजाबी परिधान पहनकर गुरुद्वारों में विशेष अरदास और कीर्तन करते हैं. गुरुद्वारों में लंगर (भंडारा) लगाया जाता है, जिसमें हर धर्म और वर्ग के लोग मिलकर भोजन करते हैं. किसान अपनी फसल की कटाई पूरी होने पर भगवान का धन्यवाद करते हैं और ढोल-नगाड़ों के साथ गिद्दा और भांगड़ा जैसे पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करते हैं.
सिख समुदाय के लिए यह दिन खासतौर पर महत्वपूर्ण होता है क्योंकि 1699 में इसी दिन श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी. इस अवसर पर नगर कीर्तन (धार्मिक शोभा यात्रा) निकाली जाती है जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब को सजे हुए पालकी में रखा जाता है और संगत कीर्तन करती है. बच्चों और युवाओं द्वारा गतका (सिख मार्शल आर्ट) का प्रदर्शन भी किया जाता है. यह पर्व लोगों में उत्साह, भाईचारे और समर्पण की भावना को और भी मजबूत करता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 13, 2025 09:17 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

