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'पीएम मोदी के फैसले महात्मा गांधी के विचारों को दर्शाते हैं', राजनाथ ने किया आदमकद प्रतिमा का अनावरण

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को राजघाट पर महात्मा गांधी की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया और कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि पिछली सरकारें बापू के मंत्र को भूल गईं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले उनके विचारों को दर्शाते हैं. प्रतिमा का अनावरण करने के बाद सिंह ने कहा, ''यह बहुत खुशी की बात है कि आज उनकी समाधि राजघाट के पास बापू की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया है.

'पीएम मोदी के फैसले महात्मा गांधी के विचारों को दर्शाते हैं', राजनाथ ने किया आदमकद प्रतिमा का अनावरण
PM Modi (Photo Credits ANI)

नई दिल्ली, 10 दिसंबर : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को राजघाट पर महात्मा गांधी की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया और कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि पिछली सरकारें बापू के मंत्र को भूल गईं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले उनके विचारों को दर्शाते हैं. प्रतिमा का अनावरण करने के बाद सिंह ने कहा, ''यह बहुत खुशी की बात है कि आज उनकी समाधि राजघाट के पास बापू की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया है.'' कार्यक्रम का आयोजन गांधी स्मृति द्वारा किया गया था. उन्होंने कहा कि वैसे तो देश-विदेश में अनगिनत स्थानों पर महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित है, लेकिन उनके स्मारक के निकट भव्य प्रतिमा की स्थापना निश्चित रूप से एक बहुत ही सराहनीय कदम है. सिंह ने कहा कि करीब 154 साल पहले जब 2 अक्टूबर को बापू का जन्म हुआ था तो एक व्यक्ति का नहीं बल्कि एक युग का जन्म हुआ था. महात्मा गांधी जीवन भर सत्ता से दूर रहे. मंत्री ने कहा, "न ही महात्मा गांधी ने अपने जीवन में कोई युद्ध लड़ा, न ही किसी देश पर विजय हासिल की. इसके बावजूद, उन्होंने अपने व्यक्तित्व और रचनात्मकता से दुनिया भर का दिल जीता."

उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी के निधन को लगभग 75 साल हो गए हैं लेकिन उनके विचारों की प्रासंगिकता और प्रभाव पहले से कहीं अधिक बढ़ रहा है. सिंह ने कहा, "यह छोटी बात नहीं है कि दुनिया के वे महापुरुष भी जो गांधीजी से कभी नहीं मिले, गांधी और गांधीवाद से बहुत प्रभावित थे. मैं मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नेल्सन मंडेला के बारे में बात कर रहा हूं जो अपने जीवन में गांधीजी से कभी नहीं मिले लेकिन एक नई राह दिखाई उनके विचारों और आदर्शों का पालन करके मानवता का मार्ग प्रशस्त करें.” मंत्री ने यह भी कहा कि महात्मा गांधी केवल स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे या केवल भारत को आजाद कराने तक ही सीमित थे. उन्होंने कहा, लोग भूल जाते हैं कि आजादी के बाद गांधीजी ने भी 'सपनों के भारत' की कल्पना की थी. उन्होंने टिप्पणी की कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनका प्रत्येक आंदोलन राजनीतिक प्रतीत होता था, लेकिन उनमें हमेशा एक गहरा आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश छिपा होता था.

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की यह शिक्षा कि 'स्वच्छता में भगवान का वास है' चंपारण आंदोलन से निकली. उन्होंने पिछली सरकारों पर कटाक्ष करते हुए कहा, ''यह देश का दुर्भाग्य है कि आजादी के बाद गांधीजी के स्वच्छता मंत्र को उस समय की सरकारों ने भुला दिया.'' सरकार बनने के बाद स्वच्छता अभियान शुरू करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बधाई दी. उन्होंने कहा, "आज 'स्वच्छ भारत आंदोलन' एक जन आंदोलन बन गया है." मंत्री ने यह भी याद किया कि महात्मा गांधी ने देश में गरीबों के सम्मान और उत्थान की कल्पना की थी. सिंह ने कहा, "उनके विचार आज हमारे प्रधानमंत्री के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं. इसका प्रतिबिंब प्रधानमंत्री के निर्णयों में दिखाई देता है." पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 50 साल पहले बैंकों का राष्ट्रीयकरण होने के बावजूद गरीब उनमें खाता तक नहीं खोल पाते थे.

उन्होंने कहा, ''जनधन योजना के माध्यम से गरीबों के 50 करोड़ बैंक खाते खोले गए हैं और उन्हें इस देश की आर्थिक व्यवस्था से जोड़ा गया है.'' उन्होंने कहा, ''हमारी सरकार देश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य की जरूरतें पूरी करने की दिशा में काम कर रही है.'' उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ एक आर्थिक चिंतक भी थे. सिंह ने कहा कि बापू का मानना था कि इस धरती पर इतने संसाधन हैं कि हर इंसान की जरूरतें पूरी हो सकती हैं, लेकिन एक इंसान की भी लालच पूरी नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि 50-60 साल पहले भारतीय समाज की दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकता यह थी कि समाज का एक विशेष वर्ग उत्पीड़ित था और उन्हें अवसरों से वंचित रखा गया था.

मंत्री ने कहा, ''महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर जैसे महापुरुषों से प्रेरणा लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने जिस तरह से दलितों के उत्थान के लिए काम किया है, वह आप सभी से छिपा नहीं है. भाजपा ने दलितों के सम्मान को पूरा महत्व दिया है. हमारे पहले कार्यकाल में, रामनाथ कोविंद, जो अनुसूचित जाति से हैं, राष्ट्रपति बने, जबकि हमारे दूसरे कार्यकाल में द्रौपदी मुर्मू, जो अनुसूचित जनजाति से हैं, भारत की राष्ट्रपति बनीं.'' सिंह ने कहा, "चाहे वह गांव का किसान हो या सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी का कॉर्पोरेट नेता, आज दलित कृषि से लेकर निजी क्षेत्र तक हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रहे हैं." उन्होंने यह भी कहा कि आज देखें तो दलित समुदाय के लोग हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं.

उन्होंने पूछा, "दलित भारत का सबसे बड़ा आकांक्षी वर्ग है. इसलिए दलित वर्ग, दलित चिंतकों को सोचना होगा कि क्या दलित शब्द के साथ खुद को जोड़ना और परिभाषित करना अभी सही है." सिंह ने कहा कि इसके बारे में कोई और नहीं सोच सकता, और किसी को भी इसके बारे में सोचने का अधिकार नहीं है, केवल आपको ही इसके बारे में सोचने का अधिकार है, और केवल आप ही सक्षम हैं. इसलिए, आपको इसके बारे में सोचना चाहिए. और इस पर निर्णय लें. उन्होंने यह भी कहा कि अब दलित सशक्त हो रहे हैं और अपना रास्ता खुद बनाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, "वे अपना रास्ता खुद बना रहे हैं. और केवल मेरे लिए ही क्यों, बल्कि मैं कहूंगा कि दलित समुदाय इस समय पूरे देश को रास्ता दिखाने के लिए आगे बढ़ रहा है."

(The above story first appeared on LatestLY on Dec 10, 2023 04:55 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).