Pharmacy Strike Today: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दवाओं की बिक्री के विरोध में AIOCD का आज देशव्यापी हड़ताल का आह्वान, मेडिसिन की हो सकती है किल्लत
ई-फार्मेसी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए दवाओं की ऑनलाइन बिक्री और भारी डिस्काउंट के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ कमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने आज एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है
Pharmacy Strike Today: ई-फार्मेसी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए दवाओं की ऑनलाइन बिक्री और भारी डिस्काउंट के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ कमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने आज एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. इस विरोध प्रदर्शन के कारण देश भर में मरीजों, विशेष रूप से पुरानी बीमारियों (क्रॉनिक कंडीशंस) के लिए रोजाना दवाओं पर निर्भर रहने वाले लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है. हालांकि, इस बंद को लेकर देश के सभी राज्यों में एक जैसी स्थिति नहीं है. कई राज्य संगठनों ने खुद को इस हड़ताल से अलग कर लिया है, जिससे इसका आंशिक असर ही देखने को मिल रहा है.
क्यों विरोध कर रहे हैं फार्मासिस्ट?
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ कमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स का कहना है कि यह हड़ताल बिना किसी सख्त नियमन (रेगुलेशन) के चल रही ऑनलाइन दवाओं की बिक्री और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स से मिल रही अनुचित प्रतिस्पर्धा को चुनौती देने के लिए है. यह भी पढ़े: Delhi Auto Cab Drivers Strike: Ola-Uber के विरोध में दिल्ली-एनसीआर में दो दिन तक ऑटो-टैक्सी की हड़ताल
इस विवाद के केंद्र में सरकार के नोटिफिकेशन GSR 220(E) और GSR 817(E) हैं. केमिस्ट संगठनों का दावा है कि इन नोटिफिकेशन्स ने ऑनलाइन दवा डिलीवरी के लिए कानूनी कमियां (लूपहोल्स) पैदा कर दी हैं, जिसका ई-फार्मेसी कंपनियां फायदा उठा रही हैं.
केमिस्टों की मुख्य मांगें क्या हैं?
AIOCD के महासचिव राजीव सिंघल के अनुसार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर "गलत या फर्जी पर्चियों (प्रिस्क्रिप्शन्स)" के इस्तेमाल से दवाओं की बिक्री का खतरा बढ़ गया है. संगठन ने सरकार के सामने मुख्य रूप से ये मांगें रखी हैं.
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ई-फार्मेसी कंपनियों के संचालन के लिए एक सख्त और स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार किया जाए.
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डॉक्टर के पर्चे के आधार पर बेची जाने वाली दवाओं (प्रिस्क्रिप्शन ड्रग्स) की ऑनलाइन बिक्री की कड़ी निगरानी हो.
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ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा दिए जा रहे 20% से 50% तक के भारी डिस्काउंट (डीप डिस्काउंटिंग) पर रोक लगे.
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पड़ोस की पारंपरिक केमिस्ट दुकानों के हितों की रक्षा की जाए.
केमिस्टों का तर्क है कि छोटे रिटेल फार्मासिस्ट ऑनलाइन कंपनियों की आक्रामक मूल्य निर्धारण नीति (एग्रेसिव प्राइसिंग) का मुकाबला नहीं कर सकते, जिससे बाजार में उनके लिए परिस्थितियां प्रतिकूल हो रही हैं.
क्या आज सभी मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे?
नहीं, आज पूरे देश में पूरी तरह से तालाबंदी की संभावना नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, पंजाब और पश्चिम बंगाल सहित कम से कम 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के फार्मासिस्ट असोसिएशन ने इस बंद से दूरी बना ली है.
इसका मतलब यह है कि इन राज्यों में स्थानीय केमिस्ट दुकानें सामान्य रूप से काम करती रहेंगी. कुछ चुनिंदा बाजारों में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है, लेकिन कुल मिलाकर उपभोक्ताओं को पूर्ण बंदी के बजाय आंशिक व्यवधान का ही सामना करना पड़ेगा.
आपातकालीन सेवाएं और सरकारी केंद्र खुले हैं
हड़ताल के आह्वान के बावजूद मरीजों की सहूलियत के लिए आवश्यक और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से काम कर रही हैं. निम्नलिखित स्थान आज भी खुले रहेंगे.
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अस्पतालों से जुड़ी सभी फार्मेसी और दवा दुकानें.
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सरकारी अस्पतालों के दवा काउंटर.
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आपातकालीन और 24 घंटे खुलने वाले चुनिंदा मेडिकल स्टोर.
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कई क्षेत्रों में संचालित जन औषधि केंद्र.
इसके साथ ही कुछ राज्यों के स्थानीय प्रशासन ने भी वैकल्पिक योजनाएं बनाई हैं ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं मिलने में कोई दिक्कत न हो.
कहां और क्या हो सकता है प्रभावित?
स्थानीय केमिस्टों की भागीदारी के आधार पर कुछ जगहों पर मरीजों को परेशानी हो सकती है. मुख्य रूप से स्वतंत्र रूप से चलने वाली पड़ोस की केमिस्ट दुकानें, थोक दवा विक्रेता (होलसेल डिस्ट्रीब्यूटर्स), स्थानीय दवा आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) और क्लीनिकों या निजी बाजारों में स्थित कुछ फार्मेसी काउंटर बंद रह सकते हैं. इन क्षेत्रों में दवाओं की अस्थायी कमी या रीस्टॉकिंग में देरी देखने को मिल सकती है.
मरीजों को पहले से तैयारी रखने की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मरीजों को सलाह दी है कि वे ऐन वक्त पर दवाएं खरीदने के बजाय पहले से ही स्टॉक सुरक्षित कर लें. विशेष रूप से मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), थायराइड, हृदय रोग और अस्थमा जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अपनी जरूरी दवाएं एडवांस में खरीद लेनी चाहिए.
यह हड़ताल पारंपरिक केमिस्ट नेटवर्क और तेजी से बढ़ते ई-फार्मेसी सेक्टर के बीच के बड़े टकराव को दर्शाती है. खुदरा केमिस्टों का कहना है कि महामारी के दौर में मिली छूट के बाद से ऑनलाइन कंपनियां बिना किसी कड़े नियम के काम कर रही हैं, जिससे एंटीबायोटिक जैसी दवाओं के दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ गया है. दूसरी ओर, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस विषय पर बातचीत जारी है और किसी भी स्थिति में मरीजों के लिए दवाओं की उपलब्धता बाधित नहीं होने दी जाएगी.