मुंबई में भाऊ बीज के शुभ अवसर से पहले भाई-बहन (Brother and Sister0 के बीच गहरे प्रेम और समर्पण की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां 11 साल की एक बहन ने अपने 15 वर्षीय भाई को जानलेवा ब्लड कैंसर (Blood Cancer) से बचाने के लिए अपनी बोन मैरो दान की, जिससे उसकी जिंदगी बच गई.
फरवरी महीने में भाई को ब्लड कैंसर का पता चला
इस साल फरवरी में अचानक तेज बुखार और असामान्य रक्त जांच के बाद पता चला कि 15 वर्षीय लड़के को तीव्र लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (ALL) है, जो एक तेजी से बढ़ने वाला खतरनाक रक्त कैंसर है। डॉक्टरों ने बताया कि इस बीमारी का तत्काल इलाज बेहद जरूरी था. यह भी पढ़े: Suzuki Motor के पूर्व चेयरमैन Osamu Suzuki का 94 साल की उम्र में निधन, ब्लड कैंसर से थे पीड़ित; ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में शोक की लहर
बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही अंतिम विकल्प
इलाज के लिए कीमोथेरेपी शुरू की गई, लेकिन तीन महीने बाद कैंसर फिर लौट आया। इसके बाद डॉक्टरों ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट को अंतिम इलाज के तौर पर सुझाया.
बहन ने दिया जीवनदान
परिवार के लिए खुशी की बात यह रही कि 11 वर्षीय बहन की बोन मैरो भाई से पूरी तरह मेल खाती थी। बहन ने बिना किसी हिचक के अपनी बोन मैरो दान की। डॉक्टरों ने बताया कि यह प्रक्रिया दर्दनाक नहीं थी और बहन के स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा।
डॉक्टरों ने क्या कहा
हेमेटोलॉजी, हेमैटो-ऑन्कोलॉजी, बीएमटी और सेलुलर थेरेपी के सह-प्रमुख, सिर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल के निदेशक डॉ. बालकृष्ण पटाडे ने बताया कि अब 140 दिन बाद भाई का स्वास्थ्य बेहतर है और उसकी रोगमुक्ति की संभावना बहुत अधिक है। उन्होंने इसे चिकित्सा विज्ञान, समय पर इलाज और परिवार के साहस का संगम बताया।
परिवार की प्रतिक्रिया
भाई के पिता ने कहा, "हमने विश्वास, उम्मीद और प्यार का असली मतलब जाना। हमारी बेटी ने अपने भाई को दूसरी जिंदगी दी। मैं सभी से आग्रह करता हूँ कि वे अंग दान को अपनाएं क्योंकि यह जीवन बचा सकता है।"
सभी के लिए प्रेरणा
यह कहानी भाई-बहन के अटूट बंधन और उम्मीद की ताकत की मिसाल बन गई है, जो समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है,













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