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Mumbai: ₹299 की ऑनलाइन शॉपिंग डील बनी ₹1 लाख की ठगी, मुंबई के निजी अस्पताल की नर्स बनी शिकार

मुंबई के एक निजी अस्पताल में कार्यरत नर्स से 299 रुपये की ड्रेस खरीदने के नाम पर 1 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है. जालसाजों ने शिपिंग और जीपीएस शुल्क के बहाने पांच दिनों के भीतर कई किश्तों में यह रकम ऐंठ ली.

Mumbai: ₹299 की ऑनलाइन शॉपिंग डील बनी ₹1 लाख की ठगी, मुंबई के निजी अस्पताल की नर्स बनी शिकार

मुंबई. डिजिटल शॉपिंग के दौर में साइबर ठगों ने अब सस्ते विज्ञापनों को अपना हथियार बनाना शुरू कर दिया है. मुंबई के एक निजी अस्पताल में काम करने वाली एक नर्स हाल ही में ऐसे ही एक गिरोह का शिकार हो गई. महज 299 रुपये की ड्रेस खरीदने की कोशिश में पीड़ित महिला ने करीब 1 लाख रुपये गंवा दिए. देवनार पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुआ ठगी का सिलसिला

पुलिस के अनुसार, एक स्थानीय हॉस्टल में रहने वाली पीड़ित नर्स ने 16 अप्रैल 2026 को फेसबुक पर एथनिक वियर (पारंपरिक कपड़ों) का एक लुभावना विज्ञापन देखा था. इसमें एक ड्रेस की कीमत केवल 299 रुपये दिखाई गई थी. जैसे ही नर्स ने इस उत्पाद में रुचि दिखाई, जालसाजों ने उनसे व्हाट्सएप (WhatsApp) के जरिए संपर्क किया.  यह भी पढ़े:  Delhi Job Fraud Busted: दिल्ली में विदेशी नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़; रानी बाग से तीन गिरफ्तार, एमबीए पास निकला आरोपी

पांच दिनों तक चलता रहा 'रिफंडेबल' पेमेंट का खेल

शुरुआत में नर्स ने ड्रेस की कीमत के रूप में 299 रुपये का भुगतान कर दिया. इसके बाद 16 से 20 अप्रैल के बीच ठगों ने विभिन्न तकनीकी बहानों से उनसे बड़ी रकम वसूलना शुरू किया. जालसाजों ने कभी शिपिंग शुल्क, कभी जीपीएस ट्रैकिंग चार्ज, तो कभी वेरिफिकेशन कोड और एड्रेस कन्फर्मेशन के नाम पर पैसे मांगे.

हैरानी की बात यह है कि हर बार आरोपियों ने नर्स को यह भरोसा दिलाया कि यह सारा पैसा 'रिफंडेबल' (वापसी योग्य) है और डिलीवरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें वापस मिल जाएगा. भरोसे में आकर नर्स ने कुल मिलाकर 1 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए.

डिलीवरी न होने पर हुआ धोखाधड़ी का अहसास

जब काफी समय बीत जाने के बाद भी पार्सल नहीं पहुंचा और जालसाजों ने संपर्क तोड़ दिया, तब पीड़िता को ठगी का अहसास हुआ. उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराई. प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह एक संगठित गिरोह है जो फर्जी सोशल मीडिया विज्ञापन, व्हाट्सएप और फर्जी डिलीवरी एजेंट बनकर लोगों को शिकार बनाता है.

साइबर सुरक्षा को लेकर पुलिस की सलाह

देवनार पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और ट्रांजेक्शन के डिजिटल फुटप्रिंट की जांच की जा रही है. साइबर विशेषज्ञों ने नागरिकों को आगाह किया है कि:

  • सोशल मीडिया पर मिलने वाले अत्यधिक सस्ते ऑफर्स से सावधान रहें.

  • किसी भी अनजान व्यक्ति को 'रिफंडेबल' चार्ज के नाम पर पैसे न भेजें.

  • हमेशा आधिकारिक और विश्वसनीय वेबसाइट्स से ही खरीदारी करें.

पुलिस अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को ट्रैक कर रही है, जिनका इस्तेमाल इस धोखाधड़ी में किया गया था. यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि ऑनलाइन लेन-देन के दौरान सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 26, 2026 11:15 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).