Monsoon 2026 Forecast and Update: जून में सामान्य से कम बारिश और भीषण लू का डबल अटैक; आईएमडी ने जारी किया देशव्यापी अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के लिए अपना दूसरा दीर्घकालिक पूर्वानुमान जारी कर दिया है. मौसम विभाग के अनुसार, इस साल जून से सितंबर के दौरान देश में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है, जिसका मुख्य कारण 'अल नीनो' का बढ़ता प्रभाव है.
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नई दिल्ली, 29 मई: भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) यानी आईएमडी (IMD) ने आज शुक्रवार, 29 मई को दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन (June-September) के लिए अपना दूसरा बड़ा दीर्घकालिक पूर्वानुमान जारी किया है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के लिए एक चिंताजनक अपडेट सामने आया है. मौसम विभाग ने इस साल देश के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में सामान्य से कम बारिश (Below-Normal Rainfall) होने की आशंका जताई है. इसके साथ ही, आगामी जून के महीने से कई राज्यों में भीषण लू (Heatwave) और अत्यधिक गर्म दिनों का एक नया दौर शुरू होने की कड़ी चेतावनी दी गई है. यह भी पढ़ें: Weather Forecast Today, May 29, 2026: दिल्ली समेत कई बड़े शहरों के तापमान में बड़ी गिरावट, मुंबई में 33°C और बेंगलुरु में 25.4°C के साथ मौसम हुआ सुहावना; जानें आज का लाइव अपडेट
दीर्घकालिक औसत (LPA) की महज 90 फीसदी होगी बारिश
मौसम विज्ञान के महानिदेशक (DG) डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि आगामी चार महीनों के मानसून सीजन के दौरान देश में दीर्घावधि औसत (Long Period Average - LPA) की केवल 90 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है. इसमें मॉडल त्रुटि का मार्जिन प्लस या माइनस 4 प्रतिशत रखा गया है.
क्षेत्रीय आधार पर बात करें तो केवल पूर्वोत्तर भारत (Northeast India) में ही स्थिति सामान्य रहने की उम्मीद है, जहाँ एलपीए की 94 से 106 प्रतिशत बारिश हो सकती है. इसके विपरीत, देश के मुख्य कृषि क्षेत्रों जैसे मध्य भारत, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और पूरे 'मानसून कोर ज़ोन' (Monsoon Core Zone) में इस बार मानसून की बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है.
जून का दृष्टिकोण: कम बारिश और रात-दिन तपेंगे
जून महीने के विशिष्ट परिदृश्य पर बात करते हुए डॉ. महापात्र ने स्पष्ट किया कि शुरुआत में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की गति धीमी रहेगी, जिससे जून की कुल वर्षा एलपीए के 92 प्रतिशत से भी कम (सामान्य से नीचे) रह सकती है. हालांकि, उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के कुछ चुनिंदा हिस्सों तथा दक्षिणी प्रायद्वीप के सुदूर इलाकों में सामान्य से अधिक बारिश देखी जा सकती है.
तापमान के मोर्चे पर भी जून का महीना बेहद कष्टकारी होने वाला है. मध्य, उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के अधिकांश क्षेत्रों में दिन का अधिकतम और रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जाएगा. यह भी पढ़ें: Bihar Weather Update: बिहार में बदला मौसम का मिजाज, भीषण गर्मी और लू से मिली बड़ी राहत, राज्य के 24 जिलों में आंधी-बारिश का 'रेड अलर्ट' जारी
इन राज्यों में जारी हुआ 'अबव-नॉर्मल' हीटवेव का अलर्ट
मौसम विभाग ने आगाह किया है कि जून के दौरान कई राज्यों को सामान्य से कहीं अधिक दिनों तक जानलेवा लू (Heatwave) का सामना करना पड़ेगा. इस अत्यधिक जोखिम वाली सूची में उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश शामिल हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र (विशेषकर विदर्भ और मराठवाड़ा), तेलंगाना और तमिलनाडु के आंतरिक हिस्सों में भी हीटवेव के दिनों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है.
अल नीनो का बढ़ता खतरा; 90% तक पहुंची संभावना
इस साल मानसून के कमजोर रहने और जून में अत्यधिक गर्मी पड़ने के पीछे की मुख्य वजह समुद्री और वैश्विक वायुमंडलीय स्थितियां हैं. आईएमडी प्रमुख ने बताया कि वर्तमान में प्रशांत महासागर में न्यूट्रल 'इंसो' (ENSO) स्थितियां तेजी से 'अल नीनो' (El Nino) की ओर बढ़ रही हैं.
जून तक अल नीनो के सक्रिय होने की संभावना बढ़कर 82 प्रतिशत हो जाएगी, जो जुलाई और अगस्त के मुख्य मानसूनी महीनों में 90 प्रतिशत के स्तर को भी पार कर जाएगी. दूसरी ओर, हिंद महासागर में 'इंडियन ओशन डिपोल' (IOD) की स्थितियां पूरे सीजन में तटस्थ (Neutral) रहने का अनुमान है, जो मानसून को कोई अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएंगी.
अंडमान में समय से पहले दस्तक; उत्तर-पश्चिम को तात्कालिक राहत
एक सकारात्मक पहलू साझा करते हुए आईएमडी ने बताया कि मई के महीने में राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है. दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अपनी सामान्य तिथि से चार दिन पहले, यानी 16 मई को ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दस्तक दे दी थी. वर्तमान में यह दक्षिण अरब सागर और लक्षद्वीप के ऊपर आगे बढ़ चुका है और अगले एक सप्ताह के भीतर केरल तथा पूर्वोत्तर राज्यों में इसके पहुंचने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं.
इसके साथ ही, उत्तर-पश्चिम भारत (दिल्ली, पंजाब, हरियाणा) के निवासियों के लिए राहत की बात यह है कि अगले तीन दिनों के दौरान सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और पूर्वी हवाओं के प्रभाव से भीषण गर्मी से कुछ समय की राहत मिलेगी. इस दौरान कई क्षेत्रों में धूल भरी आंधी, गरज-चमक के साथ बौछारें और ओलावृष्टि होने की संभावना है, जो जून की तपिश शुरू होने से पहले की तात्कालिक राहत होगी.
(The above story first appeared on LatestLY on May 29, 2026 12:42 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

