Monkey Fever: कर्नाटक में फैला मंकी फीवर, 21 मामले आए सामने; जानें कैसे होता है यह वायरस
कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में अब तक मंकी फीवर के कम से कम 21 मामले सामने आए हैं. अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मंकी फीवर से प्रभावित 21 लोगों में से आठ को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि, 13 का इलाज घर पर किया जा रहा है.
बेंगलुरु, 2 फरवरी: कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में अब तक मंकी फीवर के कम से कम 21 मामले सामने आए हैं. अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मंकी फीवर से प्रभावित 21 लोगों में से आठ को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि, 13 का इलाज घर पर किया जा रहा है. यह भी पढ़ें: Al-Nassr, Inter Miami Players Fight: क्रिस्टियानो रोनाल्डो की अल-नासर और लियोनेल मेसी की इंटर मियामी के खिलाड़ी के बीच झड़प, देखें वायरल वीडियो
उन्होंने कहा कि अधिकारी इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए सावधानियों के बारे में लोगों को जागरूक कर रहे हैं. क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (केएफडी) को आमतौर पर मंकी फीवर के रूप में जाना जाता है. यह दक्षिणी भारत में पाया जाने वाला एक मौसमी टिक-ब्रोन वायरल रक्तस्रावी बुखार है और यह मनुष्यों के लिए घातक भी साबित हो सकता है. जंगलों में और उसके आसपास रहने वाले लोगों को वायरल संक्रमण होने का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि यह वायरस ज्यादातर वन क्षेत्रों में पाया जाता है.
मंकी फीवर फ्लेविविरिडे परिवार से संबंधित एक वायरस के कारण होता है, यह वायरस का वही परिवार है जो येलो बुखार और डेंगू का कारण बनता है, जो बंदरों द्वारा फैलता है. संक्रमित जानवर के संपर्क में आने से मनुष्य इस रोग का शिकार हो जाते हैं.
जिला स्वास्थ्य अधिकारी (डीएचओ) डॉ. नीरज ने कहा कि लोगों को वन क्षेत्र में न जाने की चेतावनी दी गई है. डॉ. नीरज ने कहा, ''जिन लोगों को जंगलों में जाना होगा, उन्हें पैरों और हाथों जैसे शरीर के खुले क्षेत्रों पर लगाने के लिए तेल प्रदान किया जाएगा. वापस आने पर उन्हें ठीक से धोना होगा. अब तक 21 मामले सामने आए हैं.''
उन्होंने कहा कि लोगों को बुखार, खांसी और सर्दी के लक्षण होने पर स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क करने के लिए कहा गया है.
''दूसरी बार मंकी फीवर से प्रभावित लोगों में रक्तस्राव के लक्षण हो सकते हैं और तापमान भी बढ़ सकता है. लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि पहले लगाए गए टीके प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे हैं. नई वैक्सीन अभी आनी बाकी है, तब तक लोगों को सावधान रहना होगा.''
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 02, 2024 03:15 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

