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मोदी सरकार ने मारुति सुजुकी पर ठोका 200 करोड़ रुपये का जुर्माना, 'हेरा-फेरी' के आरोप में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने लिया बड़ा एक्शन

देश की नंबर वन कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी (Car Maker Company Maruti Suzuki) पर भारत सरकार (Modi Govt) ने 'हेरा-फेरी' करने पर 200 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India, CCI) ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (Maruti Suzuki India Limited) पर हेरा फेरी करने के मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए 200 करोड़ा रुपये का जुर्माना ठोक दिया.

मोदी सरकार ने मारुति सुजुकी पर ठोका 200 करोड़ रुपये का जुर्माना, 'हेरा-फेरी' के आरोप में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने लिया बड़ा एक्शन
फोटो, ट्विटर.

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी (Car Maker Company Maruti Suzuki) पर भारत सरकार (Modi Govt) ने 'हेरा-फेरी' करने पर 200 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India, CCI) ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (Maruti Suzuki India Limited) पर हेरा फेरी करने के मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए 200 करोड़ा रुपये का जुर्माना ठोक दिया. देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने कॉम्पटिशन के नियमों की अवहेलना करने के में यह कार्रवाई की है.

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने मारुति सुजुकी पर आरोप लगने के बाद वर्ष 2019 में जांच शुरू की थी. मारुति सुजुकी पर आरोप था कि कंपनी डीलर्स पर दबाव बनाकर कारों पर डिस्काउंट तय करती थी. कंपनी पर कारों पर डिस्काउंट को लेकर आरोप लगाए गए थे.

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वहीं इस मामले में न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की एक रिपोर्ट में दावा करते हुए कहा गया है कि, कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के दबाव के चलते कार डीलरों में बिक्री के लिए होड़ देखी गई. इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर हुआ और इससे ग्राहकों को जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा.

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने अपनी जांच में पाया कि डीलर बिना किसी दबाव के अपने हिसाब से दाम और डिस्काउंट तय करते तो कारों की कीमतें कम हो सकती थीं. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटे को अपनी जांच में दोषी पाया और कंपनी को निर्देश देते हुए कहा है कि वो इस तरह के काम से वह खुद को दूर रखे. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने 200 करोड़ रुपये की इस जुर्माने की राशि को 60 दिन के अंदर जमा करने के निर्देश दिए हैं.

बता दें कि इससे पहले 21 जून 2012 को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग एक्शन लेते हुए 11 सीमेंट कंपनियों को व्यापार संघ बनाकर कीमतें तय करने का दोषी ठहराते हुए 6000 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 23, 2021 07:42 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).