Mohan Bhagwat Security: मोहन भागवत की Z+ सुरक्षा का खर्च RSS से वसूलने की याचिका खारिज, बॉम्बे हाईकोर्ट ने PIL दायर करने वाले की मंशा पर उठाए सवाल

नागपुर निवासी ललन सिंह द्वारा दायर इस याचिका में तर्क दिया गया था कि मोहन भागवत की सुरक्षा पर प्रति माह लगभग 40 से 45 लाख रुपये खर्च होते हैं. याचिकाकर्ता का कहना था कि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन नहीं है,

(Photo Credits WC)

Mohan Bhagwat Security:  बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत को प्रदान की गई 'जेड प्लस' (Z+) सुरक्षा के खर्च से जुड़ी एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. याचिका में मांग की गई थी कि भागवत की सुरक्षा पर होने वाले लाखों रुपये के मासिक खर्च की भरपाई स्वयं संघ द्वारा की जानी चाहिए. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान याचिका दायर करने के पीछे के उद्देश्यों पर गंभीर सवाल उठाए.

याचिका में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का दावा

नागपुर निवासी ललन सिंह द्वारा दायर इस याचिका में तर्क दिया गया था कि मोहन भागवत की सुरक्षा पर प्रति माह लगभग 40 से 45 लाख रुपये खर्च होते हैं. याचिकाकर्ता का कहना था कि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन नहीं है, इसलिए किसी निजी व्यक्ति की सुरक्षा के लिए करदाताओं के पैसे का उपयोग करना सार्वजनिक धन का दुरुपयोग है.  यह भी पढ़े:  Mohan Bhagwat Video: केरल के कोच्चि में बोले RSS चीफ मोहन भागवत, ‘विकसित भारत कभी भी युद्ध का कारण नहीं बनेगा’

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया था कि सरकार इस उच्च स्तरीय सुरक्षा के लिए आने वाली लागत की वसूली मोहन भागवत या संघ से करे.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मंशा पर उठाए सवाल

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की पीठ ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया. अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता के 'मोटिव' (मकसद) और इरादे पर सवाल खड़े किए. पीठ ने संकेत दिया कि सुरक्षा प्रदान करना राज्य का नीतिगत निर्णय है और इस तरह की याचिकाओं का उद्देश्य जनहित के बजाय कुछ और हो सकता है.

मुकेश अंबानी मामले का दिया गया था हवाला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने साल 2023 के उच्चतम न्यायालय के उस फैसले का उदाहरण दिया था, जो उद्योगपति मुकेश अंबानी की सुरक्षा से संबंधित था. उस मामले में शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि अंबानी को जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की जाएगी, लेकिन उसका पूरा खर्च उनके परिवार द्वारा वहन किया जाएगा. याचिकाकर्ता ने इसी आधार पर मोहन भागवत के मामले में भी समान व्यवस्था की मांग की थी.

2015 से मिली है Z+ कवर

मोहन भागवत की सुरक्षा का स्तर समय के साथ बढ़ाया गया है. महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उन्हें पहली बार 2012 में तत्कालीन यूपीए सरकार (कांग्रेस नीत) के दौरान जेड प्लस सुरक्षा देने का निर्णय लिया गया था.

अदालत के इस फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि भागवत की सुरक्षा व्यवस्था वर्तमान प्रोटोकॉल के अनुसार ही जारी रहेगी और इसका वित्तीय भार सरकारी खजाने द्वारा ही वहन किया जाएगा.

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