देश

Jammu and Kashmir: जम्मू-कश्मीर देश का सबसे अधिक मांग वाला बन सकता है किफायती स्वास्थ्य सेवा वाला राज्य

जम्मू-कश्मीर अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.86 फीसदी स्वास्थ्य सेवा पर खर्च कर रहा है, जो देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में सबसे ज्यादा है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि स्वास्थ्य सेवा सरकार की प्राथमिकता है.

Jammu and Kashmir: जम्मू-कश्मीर देश का सबसे अधिक मांग वाला बन सकता है किफायती स्वास्थ्य सेवा वाला राज्य
प्रतिकात्मक तस्वीर (फाइल फोटो

श्रीनगर, 19 जून : जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 2.86 फीसदी स्वास्थ्य सेवा पर खर्च कर रहा है, जो देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में सबसे ज्यादा है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि स्वास्थ्य सेवा सरकार की प्राथमिकता है. पिछले 3 वर्षों के दौरान जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य सेवा को देश में सर्वश्रेष्ठ में से एक बनाने के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मील के पत्थर जमीन पर दिखाई दे रहे हैं. दो एम्स की स्थापना, एक जम्मू के लिए और दूसरा घाटी के लिए, पांच अतिरिक्त मेडिकल कॉलेज, नर्सों और पैरामेडिक्स के प्रशिक्षण के लिए पांच नए कॉलेज, 1,000 नए हेल्थकेयर और वेलनेस सेंटर राज्य की स्वास्थ्य नीति की छाप हैं.

मेडिकल कॉलेजों में सीटों में सौ फीसदी का इजाफा हुआ है. डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए इस वर्ष 500 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटें जोड़ी गई हैं और अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों में उनकी संख्या दोगुनी कर दी गई है, जिसमें से 85 सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित हैं. पीजी डॉक्टरों की कमी को दूर करने और उस स्तर पर विशेषज्ञ तैयार करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नए और पुराने मेडिकल कॉलेजों में नेशनल बोर्ड कोर्स का डिप्लोमा शुरू किया है. स्वास्थ्य अधोसंरचना के उन्नयन पर नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों को समस्त सुविधाओं से युक्त जिला चिकित्सालयों से जोड़कर उनका उन्नयन किया गया है. सभी मौजूदा 300 बिस्तरों वाले अस्पतालों को 500 बिस्तरों का दर्जा दिया जाएगा. यह भी पढ़ें : राजस्थान में राजे ही भाजपा, भाजपा ही राजे’ से राज्य इकाई में मचा कोहराम

इस वर्ष, जम्मू और घाटी में 500 बिस्तरों वाले दो नए कोविड अस्पताल स्थापित किए गए हैं, जिसके लिए डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिक्स, तकनीकी कर्मचारियों आदि की 1,366 नई भर्तियां की गई हैं. इन तमाम बड़े कदमों का नतीजा यह निकला है कि पिछले 3 सालों में नवजात मृत्यु दर 23 फीसदी से घटकर 13.3 प्रति 1000 पर आ गई है. इस अवधि के दौरान शिशु मृत्यु दर 32.4 से गिरकर 16.3 प्रति 1,000 हो गई है. लिंगानुपात 923 से बढ़कर 976 प्रति 1,000 हो गया है, संस्थागत प्रसव 7 से बढ़कर 92.4 प्रतिशत हो गया है. प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई पीएमजेएवाई -एसईएचएटी बिना किसी भेदभाव के 100 प्रतिशत आबादी को कवर कर रही है. आयुष देखभाल सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए दो आयुष कॉलेज, यूनानी और आयुर्वेदिक कॉलेज शुरू किए गए हैं. 571 एकल औषधालयों में भी आयुष की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. यह भी पढ़ें : Central Government: वेंटिलेटर और आईसीयू की जरूरत वाले मरीजों की पहचान करेगा सॉफ्टवेयर

जम्मू-कश्मीर को 2020-2021 के दौरान पीएमडीपी के तहत 140 स्वास्थ्य परियोजनाओं के लिए 881 करोड़ रुपये मिले, जो पूरे हो चुके हैं. इसके अलावा, स्वास्थ्य संस्थानों को बेहतर बनाने के लिए विश्व बैंक की 367 करोड़ रुपये की सहायता भी प्राप्त हुई. जम्मू और श्रीनगर में दो दवाएं स्थापित करने का महत्वाकांक्षी प्रस्ताव है. इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए, स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा शिक्षा में 3225-3325 करोड़ रुपये के वैश्विक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, "विरिंची हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड ने 500 बिस्तरों वाले अस्पताल के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव, एचपी कैपिटल लिमिटेड से 2,200 करोड़ रुपये का एक और प्रस्ताव 350 बिस्तरों वाले अस्पताल और 700 बिस्तरों वाले छात्र आवास के साथ हाईटेक मेडिकल विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए, जम्मू और घाटी में 6,000 लोगों के लिए रोजगार सृजन करेगा. कुछ ऐसे प्रस्ताव हैं जिन पर अंतिम निर्णय लिया जा रहा है." स्वास्थ्य सेवा का चेहरा तेजी से बदल रहा है. यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर देश में सबसे अधिक मांग वाले किफायती स्वास्थ्य देखभाल स्थलों में से एक बन जाएगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 19, 2021 01:57 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).