Jaipur Liquor Shop Strike: जयपुर में कल से बंद रहेंगी शराब की दुकानें, पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान
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Jaipur Liquor Shop Strike:  राजस्थान की राजधानी जयपुर में 16 फरवरी 2026 से सभी शराब की दुकानें अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेंगी. 'राज लिकर वेलफेयर सोसाइटी' ने पुलिस प्रशासन की कथित प्रताड़ना और दुकान बंद करने के समय में बदलाव की मांग को लेकर इस विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है. इस फैसले के बाद शहर में शराब की उपलब्धता पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है.

पुलिस कार्रवाई और समय सीमा पर विवाद

सोसाइटी के अध्यक्ष नीलेश मेवाड़ा ने बताया कि जयपुर के शराब विक्रेता पुलिस के अनावश्यक हस्तक्षेप से परेशान हैं. उनके अनुसार, सरकार द्वारा निर्धारित रात 8 बजे की समय सीमा के बावजूद पुलिसकर्मी उससे पहले ही दुकानदारों पर दबाव बनाना शुरू कर देते हैं. एसोसिएशन का दावा है कि सभी नियमों का पालन करने के बाद भी व्यापारियों को कारोबार के दौरान परेशान किया जा रहा है, जिससे उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है. यह भी पढ़े:  Delhi Premium Liquor Shop: दिल्ली के मॉल्स में खुलेंगी कई प्रीमियम शराब की दुकानें, रेवेन्यू बढ़ाने के मकसद से लिया गया फैसला

दुकानों का समय 2 घंटे बढ़ाने की मांग

हड़ताल के पीछे एक प्रमुख कारण समय विस्तार की मांग भी है. शराब विक्रेताओं की मांग है कि जयपुर में दुकानों के बंद होने का आधिकारिक समय 2 घंटे और बढ़ाया जाए. उनका तर्क है कि समय बढ़ने से न केवल बिक्री में सुधार होगा, बल्कि आखिरी समय में होने वाली भारी भीड़ को भी नियंत्रित किया जा सकेगा. विक्रेताओं का कहना है कि वर्तमान समय सीमा व्यावहारिक नहीं है और इससे राजस्व का भी नुकसान होता है.

अनिश्चितकालीन बंद की चेतावनी

एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया जाता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. 16 फरवरी से शहर के सभी शराब ठेकेदार अपनी दुकानें बंद रखेंगे और सामूहिक प्रदर्शन में भाग लेंगे. राज लिकर वेलफेयर सोसाइटी ने इसे 'अनिश्चितकालीन बंद' करार दिया है, जिसका अर्थ है कि अधिकारियों के ठोस आश्वासन के बिना व्यवसाय फिर से शुरू नहीं होगा.

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

इस हड़ताल की घोषणा से जयपुर के आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है. हालांकि, अभी तक पुलिस या आबकारी विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. जानकारों का मानना है कि यदि यह गतिरोध लंबा खिंचता है, तो सरकार को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.