International Kite Festival 2026: अहमदाबाद दौरे पर PM मोदी, अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ भगवान हनुमान की आकृति वाली पतंग उड़ाते दिखे; VIDEO
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International Kite Festival 2026:  भारत और जर्मनी के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों की एक अनूठी झलक आज अहमदाबाद में देखने को मिली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर आए जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने सोमवार को साबरमती रिवरफ्रंट पर 'अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026' का भव्य उद्घाटन किया. इस अवसर पर दोनों नेताओं ने न केवल उत्सव का आनंद लिया, बल्कि भगवान हनुमान के चित्र वाली एक विशेष पतंग उड़ाकर दुनिया को सांस्कृतिक एकजुटता का संदेश भी दिया.

सांस्कृतिक उत्सव और कूटनीति का मेल

मकर संक्रांति से पूर्व आयोजित होने वाले इस विश्व प्रसिद्ध महोत्सव में पीएम मोदी और चांसलर मर्ज़ एक खुली गाड़ी में सवार होकर पहुंचे. रिवरफ्रंट पर दोनों नेताओं ने पतंग की डोर थामी. इस दौरान आसमान में उड़ती भगवान हनुमान के चित्र वाली पतंग आकर्षण का केंद्र रही. इसके अलावा, भारत और जर्मनी के झंडों वाली पतंगें भी एक साथ उड़ती देखी गईं, जो दोनों देशों की 25 साल पुरानी रणनीतिक साझेदारी और 75 साल के राजनयिक संबंधों को दर्शाती हैं. यह भी पढ़े: Gujarat International Kite Festival: गुजरात में इंटरनेशल पतंग महोत्सव की शुरुआत, अहमदाबाद में सीएम भूपेंद्र पटेल ने समारोह में शामिल होकर उड़ाई पतंग- VIDEO

अहमदाबाद दौरे पर PM मोदी

साबरमती आश्रम में गांधीजी को श्रद्धांजलि

पतंग महोत्सव में शामिल होने से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर मर्ज़ का साबरमती आश्रम में स्वागत किया, दोनों नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। चांसलर मर्ज़ ने आश्रम की विजिटर्स बुक में अपना संदेश भी लिखा और गांधीजी के जीवन से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन किया.

द्विपक्षीय संबंधों पर अहम चर्चा

इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद, दोनों नेता गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर पहुंचे, जहाँ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता आयोजित की गई। इस बैठक में व्यापार, निवेश, हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen), रक्षा और कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। जर्मनी के चांसलर का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत यूरोप के साथ, विशेषकर जर्मनी के साथ अपने आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता है.