VIDEO: जब RBI के पास नोट छापने की मशीन है, तो वह ज्यादा नोट छापकर गरीबों को क्यों नहीं बांट देता? जानें कारण
आजकल लोग अक्सर पूछते हैं कि अगर देश में गरीबों की संख्या बढ़ रही है और लगातार महंगाई की खबरें आ रही हैं, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सीधे नोट छापकर गरीबी मिटा क्यों नहीं देता?
Can RBI Print More Notes: आजकल लोग अक्सर पूछते हैं कि अगर देश में गरीबों की संख्या बढ़ रही है और लगातार महंगाई की खबरें आ रही हैं, तो भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) सीधे नोट छापकर गरीबी मिटा क्यों नहीं देता? BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सुनने में आसान लगता है, लेकिन असल में ऐसा करना इतना आसान नहीं है. सबसे पहले यह जान लें कि भारत में नोट छापने का कानूनी अधिकार सिर्फ RBI के पास है. सिर्फ RBI ही करेंसी नोट जारी कर सकता है, जो पूरे देश में भुगतान के लिए कानूनी तौर पर मान्य होते हैं.
लेकिन RBI के नोट छापने के पीछे कई रणनीतियां और नियम हैं. वह उतने ही नोट छापता है जितने देश की आर्थिक जरूरतों और महंगाई को ध्यान में रखते हुए उचित हों.
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RBI ज्यादा नोट क्यों नहीं छापता?
जब इकोनॉमी बुरे हाल में होती है, या ऐसी ख़बरें सुनने को मिलती हैं कि इतनी फ़ीसदी आबादी ग़रीबी रेखा के नीचे है तो क्या आपके मन में भी ये सवाल आता है कि जब रिज़र्व बैंक के पास नोट छापने की मशीनें हैं ही तो वो ढेर सारे नोट छापकर ग़रीबों में बांट क्यों नहीं देता...
पर क्या ऐसा असल… pic.twitter.com/CqTU5Umyd1
— BBC News Hindi (@BBCHindi) September 2, 2025
ज्यादा नोट छापने पर क्या होगा असर?
अगर RBI असीमित नोट छापकर उन्हें सीधे लोगों में बांट दे, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. पहला असर मुद्रास्फीति (Inflation) पर होगा. क्योंकि जब बाजार में पैसा तो बहुत होगा, लेकिन सामान की मात्रा लिमिटेड रहेगी, तो चीजों के दाम अचानक से बढ़ जाएंगे. उदाहरण के लिए, अगर जो सामान पहले 100 रुपये में मिलता था, वह अब 200 या 300 रुपये में बिकेगा, तो नोट बांटने का फायदा खत्म हो जाएगा.
दूसरा असर मुद्रा के मूल्य पर पड़ेगा. ज्यादा नोटों के कारण रुपया कमजोर होगा और विदेशी मुद्रा में उसका मूल्य गिर सकता है. यानी आयात महंगा होगा और देश की अर्थव्यवस्था (Economy of India) अस्थिर हो सकती है.
जमा-पूंजी का वास्तविक मूल्य कम होगा
तीसरा असर लोगों की बचत पर पड़ेगा. जब बाजार में ज्यादा पैसा होगा, तो आम लोगों की जमा-पूंजी का वास्तविक मूल्य कम हो जाएगा. यानी नोट बांटने का मकसद भले ही गरीबों की मदद करना हो, लेकिन यह उनके लिए ज्यादा फायदेमंद नहीं होगा.
'फ्री योजनाओं' का लाभ कैसे मिलता है?
इसलिए सरकार और RBI का तरीका अलग-अलग है. DBT या प्रत्यक्ष सब्सिडी (Direct Subsidy) योजना का इस्तेमाल गरीबों तक पैसा पहुंचाने के लिए किया जाता है. इस तरह, पैसा सिर्फ उन लोगों तक पहुंचता है जिन्हें इसकी जरूरत है और बाजार में अचानक नकदी की भरमार नहीं होती.
संक्षेप में, पैसा छापना आसान है, लेकिन इसका सीधा वितरण अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक हो सकता है. इसलिए योजनाबद्ध तरीके से पैसा देना सुरक्षित और प्रभावी तरीका है.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 02, 2025 01:18 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

