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विशाखा गाइडलाइंस क्या हैं? कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए लागू इस कानून के बारे में जानिए

विशाखा गाइडलाइंस और उसके बाद के कानूनों ने कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

विशाखा गाइडलाइंस क्या हैं? कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए लागू इस कानून के बारे में जानिए

विशाखा गाइडलाइंस, जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1997 में स्थापित की गई थीं, कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम हैं. ये गाइडलाइंस यौन उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए उठाई गई मांगों के जवाब में पेश की गईं. इन गाइडलाइंस में यौन उत्पीड़न के मामलों से निपटने के लिए प्रक्रियाएं निर्धारित की गई हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और न्यायपूर्ण कार्य वातावरण बनाना है.

विशाखा गाइडलाइंस क्यों बनाई गईं?

विशाखा गाइडलाइंस की शुरुआत यौन उत्पीड़न के मामलों में वृद्धि और सार्वजनिक आक्रोश की पृष्ठभूमि से हुई. 1992 के भंवरी देवी मामले ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ लिया. भंवरी देवी, जो राजस्थान सरकार के महिला विकास कार्यक्रम के तहत एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं, को एक 9 महीने की बच्ची की शादी को रोकने के प्रयास में गैंगरेप का सामना करना पड़ा. इस घटना ने पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया और महिलाओं के अधिकारों के लिए कानूनी सुधारों की मांग की गई.

उस समय, कानूनी प्रणाली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कानूनों की कमी थी, और अपराधियों के लिए न्यायपूर्ण सजा देने के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं थी. इसके परिणामस्वरूप, कई पीड़ितों को नौकरी से हाथ धोना पड़ता था और उन्हें आगे उत्पीड़न का सामना करना पड़ता था. इन खामियों को दूर करने और महिलाओं के लिए तत्काल राहत और सुरक्षा प्रदान करने के लिए विशाखा गाइडलाइंस को एक अंतरिम उपाय के रूप में पेश किया गया.

विशाखा गाइडलाइंस के उद्देश्य

विशाखा गाइडलाइंस का मुख्य उद्देश्य कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न को रोकना और उसका समाधान करना था. यह गाइडलाइंस विशेष रूप से उस समय के कानूनी ढांचे में सुधार लाने के लिए बनाई गईं, जब महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई सख्त कानून नहीं थे. 2013 में, विशाखा गाइडलाइंस को "कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम" द्वारा प्रतिस्थापित किया गया, जिसने पीड़ितों की परिभाषा और कार्यस्थलों के दायरे को विस्तृत किया.

विशाखा गाइडलाइंस की विशेषताएँ

परिभाषा

विशाखा गाइडलाइंस के तहत, यौन उत्पीड़न को किसी भी अनचाहे यौन व्यवहार के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें शारीरिक संपर्क, अनुचित प्रस्ताव, यौन रंग की टिप्पणियाँ, और अश्लील सामग्री शामिल है.

सुरक्षित कार्यस्थल

यह गाइडलाइंस नियोक्ताओं को यह सुनिश्चित करने का दायित्व देती है कि कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण हो, शिकायतें दर्ज की जाएं, और अपराधियों के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए. नियोक्ताओं को भारतीय दंड संहिता के तहत यौन उत्पीड़न की घटनाओं को अपराध के रूप में रिपोर्ट करने और गवाहों की रक्षा करने की भी आवश्यकता है.

नियोक्ताओं के लिए दिशानिर्देश

संगठनों को शिकायतों को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की स्थापना करनी चाहिए. आईसीसी की अध्यक्षता एक महिला कर्मचारी को करनी चाहिए और इसके आधे से अधिक सदस्य महिलाएं होनी चाहिए. नियोक्ताओं को भी यौन उत्पीड़न और महिलाओं की सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.

सरकार के लिए दिशानिर्देश

यह गाइडलाइंस सरकार से इन दिशानिर्देशों को निजी क्षेत्र में भी लागू करने की अपील करती है, ताकि महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा के लिए एक एकीकृत कानूनी ढांचा तैयार किया जा सके.

यदि कार्यस्थल पर उत्पीड़न का सामना करना पड़े तो क्या करें?

यदि आप कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं और विशाखा गाइडलाइंस का पालन करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:

शिकायत दर्ज करें: सभी संबंधित विवरणों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करके शिकायत दर्ज करें.

नियोक्ता की जिम्मेदारी: नियोक्ता को उचित कार्रवाई करनी चाहिए और सिविल राइट्स एक्ट, 1964 का पालन करना चाहिए.

आईसीसी की स्थापना: नियोक्ता के लिए 10 या अधिक कर्मचारियों वाले कार्यस्थलों पर एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) स्थापित करना अनिवार्य है.

आईसीसी की प्रक्रिया: आईसीसी आपके मामले की जांच करेगी, घटनाओं के अनुक्रम के लिए समयरेखा बनाएगी, और सुझाव देगी.

यौन उत्पीड़न अधिनियम 2013 में बदलाव

1997 में स्थापित विशाखा गाइडलाइंस ने कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हालांकि, 2013 में "कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम" ने विशाखा गाइडलाइंस को प्रतिस्थापित कर दिया, जिसमें आधुनिक समय की समस्याओं को अधिक व्यापक रूप से संबोधित किया गया. इस अधिनियम ने "पीड़ित महिला" की परिभाषा का विस्तार किया और नियोक्ताओं की जिम्मेदारियों और पीड़ितों के लिए कानूनी समर्थन पर जोर दिया.

इस प्रकार, विशाखा गाइडलाइंस और उसके बाद के कानूनों ने कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 22, 2024 04:36 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).