कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाली 'कर्मचारी पेंशन योजना 1995' (EPS-95) के करोड़ों लाभार्थियों के लिए आने वाले समय में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं. लंबे समय से लंबित मांगों के बीच, न्यूनतम मासिक पेंशन में उल्लेखनीय वृद्धि और पेंशन प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आधुनिक बैंकिंग तकनीकों को अपनाने पर विचार किया जा रहा है. इन बदलावों का उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करना है.
न्यूनतम पेंशन में संभावित बढ़ोतरी
पेंशनभोगियों और विभिन्न श्रम संगठनों द्वारा न्यूनतम पेंशन को वर्तमान 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये करने की मांग की जा रही है. इस प्रस्ताव के पीछे मुख्य तर्क बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत है. यदि सरकार इस वृद्धि को मंजूरी देती है, तो पेंशन राशि में 7.5 गुना तक का इजाफा हो सकता है. हालांकि, इस निर्णय का वित्तीय भार सरकारी खजाने और ईपीएफओ के फंड पर पड़ेगा, जिसकी समीक्षा वित्त मंत्रालय द्वारा की जा रही है.
एटीएम के माध्यम से पेंशन निकासी की सुविधा
पेंशनभोगियों की सुविधा के लिए एक और बड़ा प्रस्ताव एटीएम (ATM) निकासी सुविधा शुरू करना है. वर्तमान में, कई बुजुर्ग पेंशनभोगियों को अपनी पेंशन के लिए बैंक की शाखाओं में लंबी लाइनों का सामना करना पड़ता है. ईपीएफओ एक ऐसी प्रणाली पर काम कर रहा है जिसके माध्यम से पेंशनभोगी सीधे एटीएम का उपयोग कर सकेंगे. यह कदम डिजिटल इंडिया और बैंकिंग को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है.
'नुक्कड़' सुविधा और केंद्रीकृत पेंशन भुगतान
ईपीएफओ ने हाल ही में अपनी आईटी प्रणालियों को अपग्रेड करने के प्रयास तेज किए हैं. एक केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली (CPPS) के कार्यान्वयन से देश के किसी भी हिस्से में पेंशन प्राप्त करना आसान हो जाएगा. इससे न केवल डेटा के मिलान में आसानी होगी, बल्कि पेंशन वितरण में होने वाली देरी को भी कम किया जा सकेगा. वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर के पास ही बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना इस नई रणनीति का मुख्य हिस्सा है.
पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
EPS-95 योजना के तहत लगभग 75 लाख पेंशनभोगी आते हैं. वर्तमान में, इनमें से एक बड़ी संख्या को न्यूनतम 1,000 रुपये प्रति माह पेंशन मिलती है, जिसे कई हितधारकों ने अपर्याप्त बताया है. पेंशनभोगी संगठन पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. यद्यपि अभी तक सरकार ने इन प्रस्तावों पर अंतिम आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है, लेकिन हालिया बैठकों और नीतिगत चर्चाओं से संकेत मिलते हैं कि जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं.













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