EPFO पेंशन में बड़े बदलाव की तैयारी, नई योजना से मासिक पेंशन में कटौती की आशंका; हायर पेंशन सिस्टम की जगह नई व्यवस्था लागू होने की संभावना
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) एक नई व्यापक पेंशन योजना पर विचार कर रहा है, जो मौजूदा उच्च पेंशन प्रणाली की जगह ले सकती है. इस नए ढांचे के लागू होने से भविष्य में मिलने वाले मासिक भुगतान में बदलाव की संभावना है.
EPFO Plans Pension Overhaul: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने मौजूदा पेंशन ढांचे में एक बड़े बदलाव की योजना बना रहा है. गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, संगठन एक नई पेंशन योजना (EPFO 3.0) लाने की तैयारी में है. इस नए प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य पेंशन फंड की दीर्घकालिक देनदारियों को संतुलित करना है. हालांकि, शुरुआती अनुमानों के अनुसार, इस बदलाव के कारण निजी क्षेत्र के लाखों कर्मचारियों के भविष्य के मासिक पेंशन भुगतान में कटौती हो सकती है.
उच्च पेंशन सिस्टम की जगह लेगा नया ढांचा
यह नया प्रस्ताव मौजूदा 'हायर पेंशन' मॉडल को बदलने के लिए लाया जा रहा है, जो लंबे समय से कानूनी और प्रशासनिक उलझनों में फंसा हुआ है. जानकारी के मुताबिक, नई योजना को 1 सितंबर 2014 से पिछली तारीख (Retrospective effect) से या अधिसूचना की तारीख से लागू किया जा सकता है. यह भी पढ़े: EPFO 3.0: अब UPI और ATM से निकाल सकेंगे पीएफ का पैसा, ऑटो-सेटलमेंट की सीमा बढ़कर हुई ₹5 लाखEPFO 3.0: अब UPI और ATM से निकाल सकेंगे पीएफ का पैसा, ऑटो-सेटलमेंट की सीमा बढ़कर हुई ₹5 लाख
वर्तमान में, 15,000 रुपये की वैधानिक वेतन सीमा से ऊपर वास्तविक वेतन पर योगदान करने वालों के लिए पेंशन गणना के तरीके बदले जा सकते हैं. यह कदम पेंशन फंड को स्थिर करने की एक कोशिश माना जा रहा है, जिस पर न्यायिक आदेशों के बाद उच्च योगदान की अनुमति देने का दबाव बढ़ा है.
प्रस्तावित सुधारों की मुख्य विशेषताएं
प्रस्तावित सुधारों में पेंशन योगदान और लाभों के लिए दो-स्तरीय दृष्टिकोण अपनाया गया है:
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वेतन सीमा तक योगदान: 15,000 रुपये की वैधानिक वेतन सीमा तक के अनिवार्य योगदान पर पेंशन मौजूदा फार्मूले के अनुसार ही मिलती रहेगी.
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अतिरिक्त योगदान: वेतन सीमा से अधिक वेतन वाले कर्मचारी एक अलग व्यक्तिगत खाते में योगदान करने का विकल्प चुन सकते हैं. यह भुगतान मासिक किस्तों या एकमुश्त (Lump-sum) किया जा सकेगा.
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एन्युइटी विकल्प: रिटायरमेंट के समय जमा हुए "अतिरिक्त" योगदान का भुगतान एक निश्चित पेंशन (Annuity) या व्यवस्थित निकासी के रूप में किया जाएगा, न कि मानक फार्मूले के हिस्से के रूप में.
न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव
कम आय वाले कर्मचारियों के लिए इस प्रस्ताव में एक राहत की बात भी है. केंद्र सरकार के 1.16% योगदान की मदद से न्यूनतम मासिक पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने का सुझाव दिया गया है.
कानूनी चुनौतियां और संभावित विरोध
EPFO के आंतरिक दस्तावेजों और RTI से मिली जानकारी के अनुसार, संगठन इस बात से अवगत है कि इस बदलाव का कड़ा विरोध हो सकता है. 'प्रो राटा' (Pro-rata) पद्धति लागू होने से उन लोगों की पेंशन राशि कम हो सकती है जिनकी सेवा अवधि अलग-अलग वेतन सीमा वाले युगों में रही है.
यदि इस योजना को पिछली तारीख से लागू किया जाता है, तो मौजूदा उच्च पेंशन लाभार्थियों को या तो नई योजना में बने रहने या अपने योगदान को ब्याज सहित वापस लेकर योजना से बाहर निकलने का विकल्प दिया जा सकता है.
आगे की राह
सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की आगामी बैठकों में इस कार्यान्वयन रोडमैप पर अंतिम चर्चा होने की संभावना है. सब्सक्राइबर्स को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक अधिसूचनाओं पर नजर रखें, विशेष रूप से मई 2026 की समयसीमा के संदर्भ में, जिसमें प्रोफाइल अपडेट और पेंशन विकल्प घोषणाएं की जानी हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 24, 2026 03:28 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

