India-Bangladesh Border: सीमा सुरक्षा का नया मॉडल, क्या अब सांप और मगरमच्छ करेंगे भारत-बांग्लादेश बॉर्डर की रखवाली? BSF कर रही है विचार; रिपोर्ट
भारत सरकार बांग्लादेश के साथ सटी कठिन सीमाई क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए सांपों और मगरमच्छों जैसे सरीसृपों को तैनात करने की योजना पर विचार कर रही है. यह कदम उन नदीय और दलदली इलाकों के लिए है जहां पारंपरिक फेंसिंग लगाना चुनौतीपूर्ण है.
India-Bangladesh Border: भारत सरकार बांग्लादेश के साथ सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के लिए एक लीक से हटकर योजना पर विचार कर रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, सीमा के उन कठिन हिस्सों में जहां बाड़ (Fencing) लगाना संभव नहीं है, वहां सांपों और मगरमच्छों जैसे शिकारी सरीसृपों को तैनात किया जा सकता है. 'द फेडरल' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य नदीय और दलदली क्षेत्रों में होने वाली घुसपैठ और तस्करी को रोकना है.
केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देश पर मंथन
यह संभावित कदम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उन निर्देशों के बाद आया है, जिसमें उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (BSF) को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों में प्राकृतिक बाधाओं (Natural Deterrents) का उपयोग करने की संभावना तलाशने को कहा था. गृह मंत्रालय ने बीएसएफ को निर्देश दिया है कि वे दलदली और जलजमाव वाले क्षेत्रों में इस तरह के जैविक विकल्पों की व्यवहार्यता का आकलन करें. यह भी पढ़े: India-Bangladesh Border: भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ ने बढ़ाई सुरक्षा व्यवस्था, तस्करों के खिलाफ कार्रवाई शुरू
नदीय और दलदली क्षेत्रों की सुरक्षा बड़ी चुनौती
भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा है. इसमें से लगभग 175 किलोमीटर का हिस्सा नदियों, नालों और दलदली जमीन से बना है, जहां स्थायी बाड़ लगाना तकनीकी रूप से बहुत कठिन है.
- ये गैप्स अवैध क्रॉसिंग और तस्करी के लिए संवेदनशील पॉइंट माने जाते हैं.
- प्रस्तावित योजना के तहत इन क्षेत्रों में मगरमच्छ और जहरीले सांप छोड़े जा सकते हैं.
- यह एक 'बायोलॉजिकल डिटरेंट' के रूप में काम करेगा, जिससे घुसपैठियों के मन में डर पैदा होगा.
'डिटेरेंस-फर्स्ट' रणनीति की ओर बदलाव
नई दिल्ली में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में तैनात बीएसएफ इकाइयों को उपयुक्त स्थानों की पहचान करने का काम सौंपा गया है. अधिकारियों को उन बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) का नक्शा तैयार करने को भी कहा गया है जहां मोबाइल कनेक्टिविटी खराब है.
यह दृष्टिकोण इंटेलिजेंस-आधारित सीमा प्रबंधन और पर्यावरण-आधारित सुरक्षा उपायों की ओर एक बड़े बदलाव का संकेत देता है. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि बीएसएफ वर्तमान में जनशक्ति की कमी और बुनियादी ढांचे की सीमाओं से जूझ रहा है, जिसके कारण वैकल्पिक तरीकों पर विचार किया जा रहा है.
व्यावहारिक और नैतिक चिंताएं
हालांकि यह योजना सुनने में प्रभावी लग सकती है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं.
- पर्यावरणीय प्रभाव: एक विशेष पारिस्थितिकी तंत्र में शिकारी जीवों को बड़े पैमाने पर छोड़ने से स्थानीय जैव विविधता प्रभावित हो सकती है.
- मानवीय सुरक्षा: ये जीव न केवल घुसपैठियों बल्कि ड्यूटी पर तैनात जवानों और स्थानीय नागरिकों के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं.
- प्रभावशीलता: क्या केवल सरीसृपों की मौजूदगी अवैध गतिविधियों को पूरी तरह रोकने में सक्षम होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है.
ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ
भारत-बांग्लादेश सीमा 1947 के विभाजन की विरासत है, जिसने कई समुदायों और परिवारों को दो हिस्सों में बांट दिया था. आर्थिक कारणों और स्थानीय संबंधों की वजह से अक्सर सीमा पार आवाजाही होती रहती है. सीमा प्रवर्तन (Border Enforcement) हमेशा से दोनों देशों के बीच चर्चा और कभी-कभी तनाव का विषय रहा है. मानवाधिकार समूहों ने भी अतीत में सीमा पर होने वाली घटनाओं को लेकर चिंता जताई है. ऐसे में यह नया 'सरीसृप सुरक्षा' मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किस तरह देखा जाएगा, यह आने वाले समय में पता चलेगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 06, 2026 11:42 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

