Diesel And ATF Export Duty Hiked: भारत सरकार ने डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED), जिसे आमतौर पर विंडफॉल टैक्स कहा जाता है, में बढ़ोतरी की है. संशोधित दरें 16 जून 2026 से लागू हो गई हैं. राजस्व विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर शुल्क को 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. वहीं, एटीएफ के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. Gold Rate Today, June 15, 2026: दिल्ली, मुंबई समेत कई शहरों में सोने की कीमतें स्थिर, चेक करें लेटेस्ट भाव
हालांकि, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 1.5 रुपये प्रति लीटर पर यथावत रखा गया है. वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर लागू केंद्रीय उत्पाद शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसका मतलब है कि देशभर में पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की खुदरा कीमतों पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा.
सरकार द्वारा किया गया यह बदलाव देश की पखवाड़ा समीक्षा प्रणाली का हिस्सा है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू रिफाइनिंग मार्जिन को ध्यान में रखते हुए निर्यात शुल्क की समीक्षा की जाती है. इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और आपूर्ति संतुलन बनाए रखना है.
मार्च 2026 में पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के बाद विंडफॉल टैक्स व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए थे. उस दौरान वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था. सरकार का मानना है कि निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से निजी रिफाइनर घरेलू बाजार की बजाय विदेशी खरीदारों को प्राथमिकता देने से बचेंगे और देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी.
डीज़ल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई गई
Duty on Diesel and ATF exports increased | The rate of duty will be Rs 14 per litre on exports of diesel and Rs 12.5 per litre on exports of ATF. There is no change in the rate of duty on exports of petrol.
There is no change in the existing excise duty rates on petrol and… pic.twitter.com/SwONmjSxP6
— ANI (@ANI) June 15, 2026
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने के बावजूद, भारतीय सार्वजनिक और निजी तेल कंपनियां, जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज और सरकारी रिफाइनर शामिल हैं, विविध स्रोतों से आयात और ट्रांजिट समझौतों के जरिए घरेलू आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में सफल रही हैं. सरकार द्वारा निर्यात शुल्क की अगली समीक्षा जून के अंत में किए जाने की संभावना है.












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