Petrol-Diesel Prices: क्रूड ऑयल सस्ता होने के बाद भी क्यों महंगा है पेट्रोल-डीजल? हरदीप सिंह पुरी ने बताया ₹74,781 करोड़ का पूरा गणित
Hardeep Singh Puri (Photo Credits: Instagram)

नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) (Crude Oil) की कीमतों में आई हालिया गिरावट के बाद घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल (Petrol and Diesel) के सस्ते होने का इंतजार कर रहे भारतीय उपभोक्ताओं को अभी और इंतजार करना होगा. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने इस देरी के पीछे की वास्तविक वित्तीय स्थिति को स्पष्ट किया है. केंद्रीय मंत्री ने खुलासा किया कि सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता को महंगाई के झटके से बचाने के लिए लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचा, जिसके कारण उन्हें 30 जून तक कुल 74,781 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है. इस वित्तीय घाटे के चलते फिलहाल देश में तुरंत ईंधन की कीमतों में कटौती की संभावनाओं पर ब्रेक लग गया है. यह भी पढ़ें: Nayara Petrol-Diesel Price Cut: महंगाई के बीच बड़ी राहत! कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच नायरा एनर्जी ने पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 प्रति लीटर किया सस्ता

जनता की मांग और सरकारी ओएमसी का वित्तीय बैकलॉग

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम नीचे आने के बाद से ही सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर लगातार मांग उठ रही थी कि सरकार इस गिरावट का फायदा सीधे आम आदमी तक पहुंचाए.  हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि घरेलू स्तर पर मिलने वाली कोई भी राहत तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के इस विशाल वित्तीय बैकलॉग (बकाया घाटे) के रिकवर होने से जुड़ी हुई है.

केंद्रीय मंत्री पुरी के अनुसार, भले ही वैश्विक बेंचमार्क नीचे आ गए हैं, लेकिन भारतीय तेल कंपनियां अभी भी उस बेहद महंगे कच्चे तेल की इन्वेंट्री (स्टॉक) को प्रोसेस कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया भू-राजनीतिक संकट के चरम के दौरान प्रीमियम दरों पर खरीदा गया था। यही कारण है कि वैश्विक गिरावट का असर तुरंत भारतीय फ्यूल स्टेशनों पर नहीं दिख रहा है.

महंगे कच्चे तेल की खरीद पर हरदीप पुरी

पश्चिम एशिया संकट और घरेलू कीमतों को फ्रीज रखने की रणनीति

मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी संघर्ष के दौरान समुद्री शिपिंग लाइनों और ऊर्जा बाजारों में भारी व्यवधान आया था, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं. उस दौरान देश में महंगाई को बेकाबू होने से रोकने और नागरिकों को गंभीर मूल्य झटकों से बचाने के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल खुदरा विक्रेताओं ने पंपों पर खुदरा कीमतों को फ्रीज (स्थिर) रखने का फैसला किया था.

कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के बजाय खुद वहन किया. इस रणनीति के कारण भारत पड़ोसी देशों की तरह ईंधन की किल्लत और राशनिंग जैसी गंभीर स्थितियों से तो सुरक्षित बच गया, लेकिन इसने देश की प्रमुख ऊर्जा कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) की बैलेंस शीट पर एक बड़ा वित्तीय डेंट (नुकसान) छोड़ दिया.

कब सस्ते होंगे पेट्रोल और डीजल?

सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई भी कटौती पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि ये सरकारी तेल कंपनियां अपने इस multi-crore (करोड़ों रुपये) के घाटे से कितनी जल्दी उबर पाती हैं. कूटनीतिक और आर्थिक संतुलन को देखते हुए, जब इन कंपनियों के वित्तीय मार्जिन स्थिर हो जाएंगे और वे मुनाफे की स्थिति में लौट आएंगी, तभी कच्चे तेल की वैश्विक गिरावट का सीधा लाभ भारतीय उपभोक्ताओं को मिलना शुरू होगा.