MSF Abuse Scandal: सूडानी शरणार्थियों के यौन शोषण का मामला, डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने मानी कर्मचारियों की करतूत, 59 पीड़ितों का खुलासा
MSF की यह स्वीकारोक्ति पिछले दो दशकों में अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों से जुड़े कई यौन शोषण मामलों की कड़ी में एक और बड़ा मामला माना जा रहा है. हालांकि दुनियाभर में सख्त आचार संहिता और जीरो टॉलरेंस नीतियां लागू हैं, लेकिन संघर्ष और विस्थापन वाले इलाकों में सत्ता के दुरुपयोग की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं.
MSF Abuse Scandal: अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा सहायता संस्था डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (MSF) ने स्वीकार किया है कि उसके कुछ कर्मचारियों पर पूर्वी चाड में रह रहे कम से कम 59 सूडानी शरणार्थियों के यौन शोषण और उत्पीड़न के आरोप लगे हैं. एक गोपनीय आंतरिक रिपोर्ट में सामने आया है कि राहत शिविरों में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने अपनी स्थिति का फायदा उठाकर बेहद कमजोर और असुरक्षित शरणार्थियों का शोषण किया. Ayaan Shaikh Viral Video: अमरावती सेक्स स्कैंडल में दो दोस्तों की दुश्मनी ने खोला राज, पैसों के विवाद में अयान शेख का काला चिट्ठा आया सामने
संस्था ने पुष्टि की है कि इस मामले में 2024 से जुड़े आरोपों के बाद 18 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है. हालांकि MSF अधिकारियों ने कहा कि शिकायतों में नामजद कुछ अन्य आरोपियों की पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी है.
भोजन और नौकरी के बदले यौन संबंध बनाने का आरोप
आंतरिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में स्थानीय और विदेशी सहायता कर्मियों ने शरणार्थियों को भोजन, पानी, दूध और रोजगार जैसी जरूरी सुविधाएं देने के बदले यौन संबंध बनाने का दबाव डाला. रिपोर्ट में कहा गया है कि राहत शिविरों में इस तरह के शोषण और दबाव के लगातार सामने आए मामलों को कानूनी रूप से मानव तस्करी की श्रेणी में भी देखा जा सकता है.
रिपोर्ट में संस्था की सुरक्षा और जवाबदेही प्रणाली की गंभीर खामियों की ओर भी इशारा किया गया है. कई पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराने से इसलिए परहेज किया क्योंकि उन्हें डर था कि सहायता कर्मियों के खिलाफ आवाज उठाने पर उनका जरूरी मानवीय सहयोग बंद किया जा सकता है.
शिकायतों पर नहीं मिला उचित जवाब
जिन पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई, उन्हें भी अक्सर कोई आधिकारिक जवाब या संस्थागत सहायता नहीं मिली. समाचार एजेंसी की जांच के बाद जारी बयान में MSF ने अपनी विफलताओं पर खेद जताया.
संस्था ने कहा, "यह आचरण MSF के मूल्यों और जिम्मेदारियों का गंभीर उल्लंघन है. इससे पीड़ितों को जो नुकसान पहुंचा है, उसके लिए हमें गहरा दुख है."
सूडान संकट के बीच सामने आया मामला
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सूडान गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है. देश में सेना और अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच संघर्ष के कारण गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है. इस संघर्ष की वजह से 1.1 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं, जबकि लगभग 2.8 करोड़ लोग भुखमरी जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं.
संचार व्यवस्था बाधित होने और कई इलाकों तक पहुंच सीमित होने के कारण मृतकों की सटीक संख्या का पता लगाना मुश्किल है. हालांकि विभिन्न अनुमानों के मुताबिक अब तक 1.5 लाख से 4 लाख लोगों की मौत हो चुकी है.
राहत शिविरों में भी सुरक्षित नहीं शरणार्थी
स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों ने सूडान में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के खिलाफ बड़े पैमाने पर यौन हिंसा के मामलों को दर्ज किया है. पूर्वी चाड में सामने आया यह मामला दर्शाता है कि युद्ध और हिंसा से बचकर दूसरे देश पहुंचे शरणार्थी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं.
मानवीय संगठनों के लिए फिर खड़े हुए सवाल
MSF की यह स्वीकारोक्ति पिछले दो दशकों में अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों से जुड़े कई यौन शोषण मामलों की कड़ी में एक और बड़ा मामला माना जा रहा है. हालांकि दुनियाभर में सख्त आचार संहिता और जीरो टॉलरेंस नीतियां लागू हैं, लेकिन संघर्ष और विस्थापन वाले इलाकों में सत्ता के दुरुपयोग की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं.
MSF ने कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वह स्वतंत्र शिकायत और रिपोर्टिंग प्रणाली को और मजबूत बनाने पर काम कर रही है, ताकि पीड़ित सुरक्षित तरीके से शिकायत दर्ज करा सकें और मामलों का समय पर निपटारा हो सके.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 16, 2026 09:21 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

