Bengaluru News: कर्नाटक (Karnataka) की राजधानी बेंगलुरु (Bengaluru) से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं. 34 वर्षीय मैकेनिक वेंकटरमनन की मौत उस वक्त हो गई, जब उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्हें समय पर न इलाज मिला, न ही रास्ते में किसी राहगीर ने मदद की.सोमवार तड़के करीब 3:30 बजे वेंकटरमनन को तेज सीने में दर्द हुआ, जो (Heart Attack) का संकेत था.
परिवार ने तुरंत (Ambulance) बुलाने की कोशिश की, लेकिन कोई सहायता उपलब्ध नहीं हो सकी. मजबूरी में उनकी पत्नी रूपा उन्हें बाइक पर हॉस्पिटल ले जाने निकलीं. इस घटना का वीडियो (Video) सोशल मीडिया X पर @bharathircc नाम के हैंडल से शेयर किया गया है. ये भी पढ़े:Viral Video: बेंगलुरु में रहने वाली युवती ने दिल्ली को बताया गैस चैंबर, बोली- ‘कर्ज़ लेकर भी माता-पिता को यहां से बाहर ले जाऊंगी
पत्नी की किसी ने नहीं की मदद
#Heartbreaking incident in Bengaluru has left many shaken and questioning humanity. Thirty-four-year-old Venkataramanan suffered a sudden cardiac arrest while riding a bike with his wife. Near Kadrihalli Bridge, he collapsed on the road, gasping for life. His wife screamed for… pic.twitter.com/VXSUDWDq8Z
— Bharathirajan (@bharathircc) December 17, 2025
दो हॉस्पिटलों ने नहीं दिया समय पर इलाज
जानकारी के मुताबिक़ वेंकटरमनन की पत्नी रूपा ने पहले एक निजी हॉस्पिटल लेकर पहुंचीं, जहां डॉक्टर की गैरमौजूदगी का हवाला देकर मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया गया. इसके बाद दूसरे हॉस्पिटल में (ECG) के जरिए हल्का हार्ट अटैक कन्फर्म हुआ, लेकिन आरोप है कि वहां भी न तो मरीज को स्थिर किया गया और न ही एंबुलेंस दी गई. उल्टा उन्हें दुसरे हॉस्पिटल जाने की सलाह देकर भेज दिया गया.दोबारा बाइक से निकलते समय घर से महज 200 मीटर की दूरी पर बाइक का (Accident) हो गया. हादसे के बाद वेंकटरमनन सड़क पर गिर पड़े और उनकी हालत और बिगड़ गई.
सीसीटीवी में कैद पत्नी की बेबसी
घटनास्थल के (CCTV Footage) में एक दिल दहला देने वाला दृश्य सामने आया. पत्नी रूपा ने 'दी न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया की ,' हाथ जोड़कर राहगीरों से मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन कई मिनट तक बाइक, कार और अन्य वाहन वहां से गुजरते रहे—कोई नहीं रुका. करीब 10 मिनट बाद एक टैक्सी ड्राइवर ने मदद की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.मदद मिलने के बाद वेंकटरमनन को हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इस घटना ने (Emergency Medical Care) की हकीकत उजागर कर दी.
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
वेंकटरमनन अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था. उसके पीछे पत्नी, पांच साल का बेटा, 18 महीने की बेटी और मां रह गई हैं. बताया गया कि मां अपने अन्य बच्चों को पहले ही खो चुकी थीं.
दर्द के बीच मानवता की मिसाल
इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद परिवार ने वेंकटरमनन की आंखें दान करने का फैसला किया. परिजनों का कहना है कि अगर उनका अंगदान किसी और को रोशनी दे सके, तो यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
सिस्टम और समाज दोनों कटघरे में
यह घटना (Medical Negligence) और (Public Apathy) दोनों की भयावह तस्वीर पेश करती है. सवाल यही है कि अगर अस्पताल समय पर इलाज करते और सड़क पर कोई एक व्यक्ति भी रुक जाता, तो क्या एक पिता की जान बच सकती थी?













QuickLY