Assam CM Himanta Biswa Sarma vs Abhishek Manu Singhvi Controversy: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी पर तीखा हमला बोला. पवन खेड़ा विवाद को लेकर जारी बयानबाजी के बीच सरमा ने साफ कहा कि उन्हें लोकतंत्र, सार्वजनिक संवाद या शालीनता पर किसी से सीख लेने की जरूरत नहीं है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए सिंघवी पर सीधा निशाना साधा और कहा कि "शालीनता और उनका साथ होना संभव नहीं है." Assam: असम के युवाओं पर टिप्पणी को लेकर सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रियांक खड़गे पर किया पलटवार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असली मुद्दा राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि एक निजी व्यक्ति को निशाना बनाना है. उन्होंने आरोप लगाया कि एक ऐसी महिला, जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, उसकी छवि को राष्ट्रीय टीवी पर "फर्जी दस्तावेजों" के जरिए खराब किया गया. उन्होंने कहा कि इस मामले में न्यायपालिका जरूर संज्ञान लेगी और दोषियों को सजा मिलेगी.
सरमा ने सिंघवी पर यह भी आरोप लगाया कि वह खुली बहस से बच रहे हैं और ऐसे मंचों पर बयान दे रहे हैं जहां जवाब देने का मौका नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक बहस नहीं बल्कि उससे बचने की कोशिश है. उन्होंने अपने बयान के अंत में कहा कि यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है और "सत्यमेव जयते" के साथ अपनी बात समाप्त की.
असम के मुख्यमंत्री का सिंघवी पर पलटवार, कहा- 'लोकतंत्र पर सबक लेने की जरूरत नहीं'
I don’t need lessons on democracy, public discourse or decency from anyone, especially from @DrAMSinghvi . Decency and him can never be in the same room.
The real issue here pertains to a woman - who has nothing to do with politics - but has her character assassinated on…
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) May 1, 2026
यह पूरा विवाद तब और बढ़ गया जब सिंघवी ने पवन खेड़ा मामले को लेकर सरमा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का जिक्र किया. सिंघवी ने कहा था कि इस तरह के सार्वजनिक बयान लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करते हैं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा जरूरी है.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को इस मामले में अग्रिम जमानत दी थी. यह मामला कथित तौर पर मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा को लेकर की गई टिप्पणियों से जुड़ा है. जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की बेंच ने कुछ शर्तों के साथ राहत दी थी. इस पूरे घटनाक्रम के बाद असम में बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनातनी और बढ़ गई है.











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